आगरा नगर निगम में ‘एंट्री टैक्स’ पर बवाल: किसान से मांगे 50 रुपये तो सड़क पर ही धरने पर बैठ गए श्याम सिंह चाहर, अधिकारियों के हाथ-पांव फूले

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​आगरा: ताजनगरी के नगर निगम परिसर में बुधवार को उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया, जब गेट पर किसानों से अवैध वसूली की कोशिश की गई। नगर निगम स्थित भूमि अध्याप्ति कार्यालय जा रहे किसानों से गेट पर जबरन 50 रुपये मांगे गए, जिससे गुस्साए किसान नेता श्याम सिंह चाहर चिलचिलाती धूप में परिसर के अंदर ही धरने पर बैठ गए। आधे घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद जब ठेकेदार और अधिकारियों ने माफी मांगी, तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।

क्या था पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, किसान गोपाल शर्मा अपने साथियों के साथ नगर निगम परिसर में स्थित भूमि अध्याप्ति अधिकारी (SLAO) कार्यालय जा रहे थे। जैसे ही उनकी मोटरसाइकिल नगर निगम गेट के अंदर दाखिल हुई, वहाँ मौजूद कुछ लड़कों ने उन्हें रोक लिया और 50 रुपये की मांग की। किसानों द्वारा कार्य का हवाला देने और मना करने पर विवाद बढ़ गया।

​धूप में धरने पर बैठे किसान नेता

घटना की जानकारी मिलते ही किसान नेता श्याम सिंह चाहर मौके पर पहुंच गए। अवैध वसूली और कर्मचारियों के व्यवहार से आक्रोशित होकर वे दोपहर करीब 1 बजे गेट के पास सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। तेज धूप और गर्मी के बावजूद किसान नेता श्याम सिंह चाहर, गोपाल शर्मा, लक्ष्मीनारायण बघेल और सत्यवीर डटे रहे। किसानों के इस तेवर को देखकर ठेकेदार और निगम के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

माफी और सीएम से शिकायत की चेतावनी

करीब 30 मिनट तक चले हंगामे के बाद संबंधित ठेकेदार और एक विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से हुई बदसलूकी और वसूली की कोशिश के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया।

किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने इस घटना को भ्रष्टाचार का गंभीर मामला बताते हुए कहा, “नगर निगम परिसर में सरकारी दफ्तर जाने वाले किसानों को इस तरह लूटना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी से की जाएगी।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोबारा किसी किसान से अवैध वसूली की गई, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

​वसूली की शिकायतों से किसान त्रस्त

​सूत्रों के अनुसार, नगर निगम परिसर में पार्किंग या एंट्री के नाम पर आए दिन किसानों से अवैध वसूली की शिकायतें मिलती रही हैं। किसानों का तर्क है कि वे सरकारी काम से कार्यालय आते हैं, ऐसे में उनसे शुल्क वसूलना अनैतिक है।