आगरा: ताजनगरी की पर्यावरण और यातायात व्यवस्था को लेकर बुधवार को जिला पर्यावरण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले संजय प्लेस की बदहाली और भारी वाहनों के अवैध प्रवेश का मुद्दा छाया रहा। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन ने ठोस तथ्यों के साथ प्रशासन के समक्ष शहर की ज्वलंत समस्याओं को रखा।
संजय प्लेस: फुटपाथ गायब, सड़क पर जान जोखिम में डाल रहे राहगीर
बैठक में अधिवक्ता केसी जैन ने कहा कि व्यावसायिक केंद्र संजय प्लेस में फुटपाथों पर अतिक्रमण और उनकी जर्जर स्थिति के कारण पैदल यात्रियों के लिए कोई जगह नहीं बची है। लोग मजबूरन मुख्य सड़क पर चलते हैं, जिससे न केवल जाम लगता है बल्कि हादसों का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षित फुटपाथ नागरिकों का मौलिक अधिकार है।
इस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने नगर निगम को सख्त निर्देश दिए कि संजय प्लेस के फुटपाथों के कायाकल्प के लिए एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ तैयार किया जाए और अगली बैठक में इसकी विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
नॉर्दर्न बाईपास का क्या फायदा? शहर में अब भी ट्रकों का शोर
बैठक में 14 किलोमीटर लंबे नॉर्दर्न बाईपास के प्रभावहीन होने पर भी चर्चा हुई। केसी जैन ने बताया कि 4 दिसंबर 2025 को इस बाईपास के शुरू होने का मुख्य उद्देश्य भारी वाहनों को शहर के बाहर से निकालना था, लेकिन आज भी बाहरी ट्रक और भारी वाहन एनएच-19 से होकर शहर के बीचोंबीच से गुजर रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि रैपुरा जाट और कुबेरपुर पर अनिवार्य डायवर्जन लागू किया जाए और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 115 के तहत सख्त अधिसूचना जारी कर बाहरी वाहनों के शहर में प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।
जिलाधिकारी ने इस पर परिवहन विभाग के साथ मिलकर ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया।
टीटीजेड (TTZ) में हरियाली का संकट: मात्र 3% वन क्षेत्र
पर्यावरण के मुद्दे पर चिंता जताते हुए बताया गया कि ताज ट्रेपेजियम जोन में हरित क्षेत्र की स्थिति दयनीय है। यहाँ मात्र 3 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जबकि लक्ष्य 33 प्रतिशत का है। अधिवक्ता जैन ने तर्क दिया कि पेड़ काटने की अनुमति के बदले दस गुना पौधारोपण और सुप्रीम कोर्ट की जटिल प्रक्रिया के कारण लोग पौधारोपण से कतरा रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि इस प्रक्रिया को व्यावहारिक और सरल बनाया जाए ताकि किसानों और निजी क्षेत्रों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

