आगरा में ‘किसान दिवस’ की निकली हवा: सीडीओ की चंद मिनटों की हाजिरी और गायब अधिकारी; भड़के किसानों ने कहा— ‘अधिकारियों ने बना दिया मजाक’

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आगरा: ताजनगरी में बुधवार को विकास भवन में आयोजित ‘किसान दिवस’ महज एक औपचारिकता बनकर रह गया। किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए बुलाई गई इस बैठक में प्रशासनिक संवेदनहीनता का आलम यह था कि जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) महज चंद मिनटों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर चलते बने। अधिकारियों की गैर-मौजूदगी और अधूरे जवाबों से गुस्साए किसान नेताओं ने जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि जिले के जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलना ही नहीं चाहते।

सूखी नहरें और अधिकारियों की खामोशी

बैठक में किसान रामगोपाल शर्मा ने नहर विभाग और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि भीषण गर्मी और बुवाई के समय नहरों में पानी क्यों नहीं है? हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद कोई भी अधिकारी इसका संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकारी एक-दूसरे को बचाने में जुटे हैं और धरातल पर समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो रहा है।

ओलावृष्टि के मुआवजे में ‘खेल’: ‘जितना पैसा, उतना नुकसान’

ताज सिटी आलू समिति के प्रदेश सचिव लक्ष्मीनारायण बघेल ने लेखपालों और राजस्व विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं-सरसों की फसलें बर्बाद हो गईं, लेकिन लेखपालों की जांच में ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) का बोलबाला है। बघेल ने कहा, “जितना पैसा दो, उतनी नुकसान की रिपोर्ट बनती है। जो पैसे नहीं देता, उसका नुकसान कागजों में शून्य दिखा दिया जाता है।”

​सैटेलाइट को पराली दिखती है, ओला नहीं?

किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने तकनीक के दोहरे मापदंडों पर तंज कसते हुए कहा, “जब दिल्ली में बैठे अधिकारियों को सैटेलाइट से खेत में जलती पराली दिख जाती है, तो क्या उसी सैटेलाइट को किसानों के खेतों में गिरे ओले और बर्बाद फसल नहीं दिखती?” उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि कानून का इस्तेमाल केवल किसानों को प्रताड़ित करने के लिए न किया जाए।

​गौशालाओं की स्थिति बदतर: ‘एसी में बैठे सीवीओ और देहात में जुए के अड्डे’

गौशालाओं की दुर्दशा पर बोलते हुए श्याम सिंह चाहर ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) विभाग पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देहात की कई गौशालाएं अब जुए के अड्डों में तब्दील हो चुकी हैं। बेसहारा गोवंश के लिए न तो हरे चारे का प्रबंध है और न ही साफ पानी का। सरकारी धन का बंदरबांट हो रहा है और गायें चिलचिलाती धूप में दम तोड़ रही हैं।

​आंदोलन की चेतावनी

किसानों ने सामूहिक रूप से नाराजगी जाहिर की कि पिछले दो वर्षों में एक भी ऐसी समस्या का समाधान नहीं हुआ जिसका ब्यौरा अधिकारी दे सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के भ्रष्ट अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं।

सत्यवीर, बासुदेव और रविंद्र सिंह सहित उपस्थित सभी किसान नेताओं ने ऐलान किया कि यदि जल्द ही नहरों में पानी और ओलावृष्टि का सही मुआवजा नहीं मिला, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव कर बड़ा आंदोलन करेंगे।