जासूसी के क्षेत्र में भविष्य बनाने की राह दिखाती पुस्तक ‘हाउ टू बिकम अ डिटेक्टिव’ प्रकाशित

जासूस और इन्वेस्टिगेटर बनने के इच्छुक युवाओं को व्यावहारिक जानकारी और सही दिशा देने का प्रयास नई दिल्ली, 14 सितंबर: जासूसी और इन्वेस्टिगेशन के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए Detective Guru राहुल राय गुप्ता की पुस्तक ‘हाउ टू बिकम अ डिटेक्टिव’ प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तक उन युवाओं को ध्यान में रखकर लिखी […]

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‘बेस्टसेलर’ टैग: किताब बेची जा सकती है, लेकिन एक सच्चा पाठक खरीदा नहीं जा सकता

छपे हुए पन्ने एक किताब से बढ़कर कुछ नहीं होते। ये लेखक के विचार, अनुभव, भावनाएँ, कल्पना और वर्षों की रचनात्मक मेहनत का सार होते हैं। एक अच्छी किताब का पाठक के साथ एक ऐसा रिश्ता होता है जो क्षणिक प्रसिद्धि या व्यावसायिक सफलता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। लेकिन आज के प्रकाशन उद्योग […]

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हर किसी का अपना सावन: प्रकृति, संस्कृति और भावनाओं का अनूठा उत्सव

भारत मानसून के आगमन के साथ मौसम में बदलाव का स्वागत करता है, और इससे भी कहीं अधिक। यह एक ऐसे मौसम की शुरुआत है जो फलों की भरपूर फसल, ताजगी और नए जीवन को जन्म देता है, साथ ही मानव हृदयों में नई आशा और सदियों से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करता है। […]

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गांधीवाद बनाम डिजिटल प्रतिरोध: ‘कॉकरोच आंदोलन’ के आईने में समकालीन युवा असंतोष का विश्लेषण

भारत में जब भी कोई नया जन-आंदोलन उभरता है, उसे पुराने वैचारिक फ्रेमों में समझने की कोशिश होती है। कॉकरोच आंदोलन के साथ भी यही हुआ है। कुछ लोग इसे युवाओं के असंतोष की नई अभिव्यक्ति मानते हैं, तो कुछ इसे गांधीवादी परंपरा की छाया में पढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। किंतु प्रश्न यह […]

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अच्छा जीवनसाथी नहीं मिल रहा, या हमारी अपेक्षाएँ बदल गई हैं?

आज के समय में अक्सर यह सुनने को मिलता है कि “शादी के लिए अच्छा लड़का नहीं मिल रहा।” यह बात सिर्फ लड़कियों तक सीमित नहीं है। कई लड़के भी कहते हैं कि “अच्छी लड़की नहीं मिल रही।” ऐसे में सवाल यह नहीं है कि अच्छे लोग खत्म हो गए हैं, बल्कि यह है कि […]

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दोबारा लौट रहे लोग लकड़ी की खाट पर…आधुनिक जीवनशैली के बीच परंपरा, स्वास्थ्य और पर्यावरण का पुनर्जागरण

एक समय था जब भारतीय घरों, आँगनों, चौपालों और खेतों में लकड़ी की खाट जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थी। सुबह की चाय से लेकर रात की नींद तक, खाट केवल एक फर्नीचर नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जीवन का केंद्र थी। लेकिन जैसे-जैसे आधुनिकता का प्रभाव बढ़ा, शहरीकरण ने गति पकड़ी और […]

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जब मौत बन जाए सोशल मीडिया का कंटेंट: वायरल संस्कृति पर बड़ा सवाल

हाल के दिनों में एक मासूम बच्चे की निर्मम हत्या और हांसी में एक दुकानदार की दर्दनाक हत्या से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से पोस्ट और शेयर किए जा रहे हैं। इन वीडियो की एक झलक मात्र ही किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कंपा देने के लिए पर्याप्त है। पूरे वीडियो को […]

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सुपरमॉम के भ्रम से परे: आधुनिक परवरिश और माँ की बदलती भूमिका

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन की सबसे गहरी अनुभूति है। संसार में बच्चे की पहली पहचान, पहला स्पर्श, पहला भरोसा और पहली शिक्षा माँ से ही शुरू होती है। किसी भी समाज की सभ्यता और संवेदनशीलता इस बात से आँकी जा सकती है कि वहाँ मातृत्व को कितना सम्मान और महत्व दिया जाता […]

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ममता का किला ढहा, भगवा लहर का उदय…बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, राजनीतिक मायने और विपक्ष का संकट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी ने 165+ सीटें जीतकर TMC के 15 वर्षीय शासन को उखाड़ फेंका। एंटी-इनकंबेंसी, घुसपैठ, भ्रष्टाचार और CAA ने मातुआ वोट एकजुट किया। ममता की ‘अजेय’ छवि टूटी, विपक्ष कमजोर। राष्ट्रीय INDIA गठबंधन प्रभावित, पूर्वी भारत में BJP विस्तार। नई सरकार विकास-कानूनव्यवस्था पर फोकस करेगी, परंतु हिंसा रोकना चुनौती। […]

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मंडल, कमंडल और मोदी युग: कैसे बदली 1977 से 2026 तक देश की राजनीतिक दिशा?

जून 1975 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया, तो उन्होंने अनजाने में भारतीय लोकतंत्र की उस नई नींव की आधारशिला रख दी थी, जिसने आने वाले पांच दशकों की राजनीति को परिभाषित करना था। 1977 का चुनाव महज एक मतदान नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की बहाली का जनादेश था, जिसने मोरारजी देसाई के […]

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