सफाई कर्मचारी: आधुनिक शहर की व्यवस्था के असली शिल्पकार

किसी भी शहर की पहचान उसकी ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों या चमकती रोशनियों से नहीं, बल्कि उसकी स्वच्छता और व्यवस्था से होती है। जब कोई व्यक्ति किसी शहर में प्रवेश करता है, तो सबसे पहले उसकी नज़र वहाँ की साफ़-सफाई, वातावरण और नागरिक अनुशासन पर जाती है। स्वच्छ शहर केवल सुंदर नहीं दिखते, बल्कि वे […]

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यमुना की लहरों में बहती जिंदगी और सोया हुआ तंत्र, सामूहिक उदासीनता की कीमत कब तक चुकाएंगे मासूम?

12 मई, 2026 की शाम आगरा के एक घाट पर जो हुआ, वह कोई संयोग या महज़ दुर्भाग्य नहीं था। जन्मदिन मनाने आए छह युवा यमुना में उतरे। दो घंटे तक उन्हें बचाने की कोशिशें चलती रहीं, लेकिन अंततः चार बच्चों के शव बाहर निकाले गए। आए दिन ये दुर्घटनाएं हो रही हैं। पुलिस ने […]

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डिग्रियों का अंबार या हुनर की कमी? शिक्षा की रेस में क्यों पिछड़ रहा है ‘कौशल’

आज का समाज एक अजीब विरोधाभास के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ शिक्षा का स्तर पहले से कहीं अधिक ऊँचा दिखाई देता है—हर घर में बच्चे पढ़ रहे हैं, कोचिंग, ऑनलाइन क्लासेस और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं, और परिणामस्वरूप अंक भी लगातार बेहतर हो रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ एक […]

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आस्था का बाज़ारीकरण: जब भगवान के दरबार में भी पैसा और पहुँच तय करने लगी दर्शन की गति!

भारत जैसे देश में, जहाँ धर्म और आस्था केवल व्यक्तिगत विश्वास का विषय नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, वहाँ मंदिरों और तीर्थ स्थलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। ये स्थान सदियों से समानता, शांति, और आध्यात्मिक संतुलन के प्रतीक माने जाते रहे हैं। “भगवान के दरबार में सब बराबर […]

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कब खुलेंगे बुंदेलखंड के घरों में लटके पलायन के जंग लगे ताले?

बुंदेलखंड, यह केवल एक नाम या क्षेत्र नहीं है, यह शौर्य और स्वाभिमान की वह धरती है जिसने रानी लक्ष्मीबाई जैसे वीरों को जन्म दिया। लेकिन आज जब हम इस माटी की ओर देखते हैं, तो समझ आता है कि वर्तमान में इस वीर धरा की सबसे बड़ी त्रासदी कोई युद्ध नहीं, बल्कि वह खामोश […]

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हिस्ट्रीशीटर बने रिपोर्टर: जब कलम की जगह ‘कैमरा’ बन जाए अवैध वसूली का आधुनिक कट्टा

यह महज़ पत्रकारिता के गिरते स्तर का रोना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के मलबे पर खड़े एक संगठित अपराध की डरावनी कहानी है। आज मोबाइल कैमरे, कौड़ियों के भाव मिलने वाले आई-कार्ड और सस्ते चाइनीज माइक जनसेवा के उपकरण नहीं, बल्कि अवैध वसूली के सबसे घातक हथियार बन चुके हैं। एक ऐसा […]

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इमोशन से ‘बिजनेस डील’ बनती शादियाँ: मेट्रो शहरों में आर्थिक दबाव ने पैदा किया युवाओं में शादी का खौफ

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि दो वयस्क अपनी आपसी सहमति से एक साथ रह रहे हैं, तो इसे कानून की नजर में अपराध नहीं माना जा सकता, भले ही उनमें से कोई एक साथी पहले […]

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अस्पताल जाना जिम्मेदारी है, औपचारिकता नहीं; जानें मरीज की मदद करने का सही और व्यावहारिक तरीका

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती […]

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विरासत पर लापरवाही का साया: आगरा के 265 स्मारकों पर मंडराया संकट, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

आगरा (बृज खंडेलवाल): दुनिया भले ही ताजमहल की धवल चमक पर फिदा हो, लेकिन इसी शहर की गलियों में इतिहास सिसक रहा है। आगरा की असली पहचान उसके गुमनाम मकबरे, टूटते दरवाजे और झाड़ियों में तब्दील होते मुगलकालीन बाग आज व्यवस्था की अनदेखी के कारण दम तोड़ रहे हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ एडवोकेट […]

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फ्यूचर इकोनॉमी: कार्बन क्रेडिट के जरिए भारत कैसे हासिल करेगा 2030 के जलवायु लक्ष्य और आर्थिक बढ़त?

आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है। मौसम का असंतुलन, बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश और प्राकृतिक आपदाएँ अब सामान्य बात बनती जा रही हैं। ऐसे समय में ‘कार्बन क्रेडिट’ शब्द अक्सर सुनने को मिलता है। लेकिन आम नागरिक के मन में सवाल होता है आखिर यह है क्या? और इसका हमसे […]

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