आगरा के उद्योगों पर ‘युद्ध’ की मार: गैस कटौती से उत्पादन ठप, नेशनल चैम्बर ने बिजली कनेक्शन और राहत पैकेज की उठाई मांग

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​आगरा: वैश्विक तनाव और युद्ध के चलते उपजे ऊर्जा संकट ने ताजनगरी के उद्योगों की कमर तोड़ दी है। बुधवार को नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स (NCIC) के सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में उद्यमियों ने अपनी समस्याओं को लेकर सरकार और एमएसएमई (MSME) विभाग के सामने कड़ा रुख अपनाया। बैठक का मुख्य केंद्र गेल गैस (GAIL Gas) द्वारा की जा रही कटौती और वैकल्पिक ऊर्जा के संसाधनों की कमी रहा।

​गैस नहीं तो बिजली दो: चैम्बर अध्यक्ष की मांग

​चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि ताज ट्रपेज़ियम ज़ोन (TTZ) के अंतर्गत आने के कारण आगरा के उद्योग पहले से ही कई पर्यावरणीय प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। अब गेल गैस द्वारा की गई गैस कटौती ने उद्योगों को बंद होने की कगार पर खड़ा कर दिया है। उन्होंने मांग की कि जहाँ गैस की आपूर्ति कम है, वहां उद्योगों को तत्काल वैकल्पिक ईंधन के रूप में विद्युत कनेक्शन (Electricity Connections) जारी किए जाएं ताकि उत्पादन जारी रह सके।

​विशेष राहत पैकेज और कुटीर उद्योगों पर जोर

​बैठक में उद्यमियों ने केंद्र और राज्य सरकार से आगरा के लिए एक विशेष आर्थिक राहत पैकेज की मांग की। उद्यमी संजय गोयल ने कहा कि कुटीर और छोटे उद्योगों को भी बड़ी इकाइयों की तरह सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने ऋण पर सब्सिडी और श्रम कानूनों में लचीलेपन की आवश्यकता जताई ताकि स्थानीय रोजगार बचा रहे।

​एमएसएमई विभाग ने दिया योजनाओं का भरोसा

एमएसएमई के सहायक निदेशक अभिषेक कुमार ने उद्यमियों को जानकारी दी कि विभाग वर्तमान संकट से प्रभावित उद्योगों का डेटा जुटा रहा है। उन्होंने बताया कि एमएसएमई पंजीकरण (Udyam) के जरिए उद्यमियों को ऑनलाइन ट्रेडिंग, ट्रेनिंग मैनेजमेंट और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों जैसी कई सुविधाएं मिल सकती हैं।

वहीं, सहायक निदेशक नेहा मेहतो ने ‘जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट’ और ‘लीन योजना’ के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाना और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है, जिससे आगरा के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर सकें।

​प्रमुख उद्यमियों की रही उपस्थिति

​मंथन बैठक में उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, अम्बा प्रसाद गर्ग, विनय मित्तल, मनीष अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, प्रशांत मित्तल, गोमित जैन, विकास मित्तल सहित बड़ी संख्या में शहर के प्रमुख उद्यमी और व्यापारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई, तो आगरा के कांच और पेठा सहित कई प्रमुख उद्योग संकट में फंस जाएंगे।