लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के भीतर अनुशासन और नियंत्रण को सख्त करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए तीन वरिष्ठ नेताओं धर्मवीर अशोक, जयप्रकाश और सरफराज रैन को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस फैसले ने न केवल बसपा के भीतर बल्कि विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है।
कांशीराम युग के स्तंभ थे धर्मवीर अशोक
निष्कासित नेताओं में सबसे बड़ा नाम पूर्व मंत्री धर्मवीर अशोक का है। धर्मवीर अशोक की पहचान बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ कई अन्य राज्यों में भी उन्होंने पार्टी को खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी विदाई को बसपा के जमीनी नेटवर्क के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
जयप्रकाश की ‘घर वापसी’ के बाद फिर निष्कासन
वहीं, जयप्रकाश की हाल ही में बसपा में वापसी हुई थी और उन्हें केरल जैसे राज्यों में चुनाव की कमान सौंपी गई थी। युवाओं के बीच लोकप्रिय जयप्रकाश पर आरोप है कि सांगठनिक कार्यों में दखल और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ मतभेदों के चलते उन पर यह कार्रवाई की गई है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के भीतर कार्यशैली को लेकर उभरा असंतोष इस कड़े फैसले की मुख्य वजह बना।
चुनावी रणनीति पर मंडराया संकट
आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी बसपा के लिए यह समय काफी संवेदनशील है। धर्मवीर अशोक, जयप्रकाश और सरफराज रैन की टिकट वितरण और प्रभारियों की नियुक्ति में अहम भूमिका थी। उनके जाने से पार्टी का कैडर और चुनावी समीकरण प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि एक तरफ जहाँ बसपा पुराने नेताओं को जोड़ने की मुहिम चला रही थी, वहीं इस निष्कासन से उस अभियान को बड़ा झटका लगा है।
मायावती का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है, चाहे इसके लिए पुराने और कद्दावर नेताओं को ही बाहर क्यों न करना पड़े। अब देखना यह होगा कि पश्चिमी यूपी के ये दिग्गज नेता भविष्य में अपनी अगली राजनीतिक पारी कहाँ से शुरू करते हैं।

