पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात एक मामूली चपरासी ने अधिकारियों की नाक के नीचे से सरकारी खजाने के करीब 8.15 करोड़ रुपये पार कर दिए। इस घोटाले का मास्टरमाइंड इल्हाम शम्सी उर्फ रहमान निकला, जिसने अपनी पत्नियों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर विभाग को करोड़ों का चूना लगाया।
रिश्तेदारों को बना दिया सरकारी धन का हिस्सेदार
पुलिस की सघन जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी चपरासी ने गबन की गई इस भारी-भरकम राशि को अपनी दोनों पत्नियों, साली, सास, सलहज और महिला मित्रों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया था। पुलिस ने अब तक इस नेटवर्क से जुड़ी सात महिलाओं को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने करीब 53 संदिग्ध बैंक खातों का इस्तेमाल किया और इस रकम से भारी मात्रा में जमीन और संपत्तियों में निवेश किया। गनीमत यह रही कि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 5.50 करोड़ रुपये की राशि को खातों में ही फ्रीज कर दिया है।
7 साल तक चलता रहा ‘सिस्टम’ से खिलवाड़
हैरानी की बात यह है कि यह घोटाला साल 2018 से लगातार चल रहा था। आरोपी इल्हाम शम्सी पहले एक इंटर कॉलेज में तैनात था, लेकिन धीरे-धीरे उसने DIOS कार्यालय में अपनी ऐसी पैठ बनाई कि वह शिक्षकों के वेतन मद से छेड़छाड़ करने लगा। उसने फर्जी बेनेफिशियरी आईडी और ट्रेजरी टोकन जनरेशन का सहारा लेकर सिस्टम की हर सुरक्षा को भेद दिया। इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब फरवरी में बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने ट्रांजैक्शन में गड़बड़ी की सूचना दी।
अधिकारियों की भूमिका पर भी गहरा रहा शक
मामले की गंभीरता को देखते हुए नए पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने जांच के दायरे को बढ़ा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सात साल तक चल रहे इस करोड़ों के गबन की भनक किसी बड़े अधिकारी को नहीं लगी? अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने स्पष्ट किया है कि जांच के रडार पर विभाग के पुराने रिकॉर्ड भी हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इस खेल में चपरासी के पीछे और किन प्रभावशाली चेहरों का हाथ था।
पुलिस का दावा है कि इस घोटाले की तह तक जाकर सरकारी धन की रिकवरी की जाएगी और शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

