लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनावी रण से पहले जुबानी जंग अब और भी निजी और रणनीतिक होती जा रही है। दोनों डिप्टी सीएम, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के आक्रामक पलटवार के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए ‘नहले पर दहला’ मारा है। अखिलेश ने भाजपा के भीतर की गुटबाजी की ओर इशारा करते हुए दोनों नेताओं की एकजुटता को महज एक ‘दिखावा’ करार दिया है।
“दिखाने को हमकदम, असल में एक-दूसरे का गम”
अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक की पोस्ट का हवाला देते हुए तंज कसा कि भाजपा में नाम लिखने की वरीयता को लेकर भी राजनीति चल रही है। उन्होंने लिखा, “पहले अपना नाम लिखा फिर उनका… भाजपा में यह चल क्या रहा है?” अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा की असली सच्चाई एक-दूसरे को पीछे धकेलने की साजिश है, जबकि जनता के सामने ये नेता साथ चलने का ढोंग करते हैं। उन्होंने एक शेर के जरिए चुटकी लेते हुए कहा “ये जो दिखाने को चलते हमक़दम हैं, दरअसल यही एक-दूसरे का ग़म हैं।”
’कृपापात्र’ बनाम ‘जीते हुए’ की नई बहस
सपा प्रमुख ने अपने वार में ‘पोस्टिंग’ और ‘जनादेश’ के अंतर को भी हवा दी। उन्होंने बिना नाम लिए इशारा किया कि ‘कृपापात्र पोस्टिंग’ (मनोनीत) पर बैठे लोगों को जनता द्वारा ‘जीते हुए’ नेताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार नहीं करना चाहिए। अखिलेश ने तंजिया लहजे में दूसरे डिप्टी सीएम को ‘प्रतीक्षारत मुख्यमंत्री’ (Waiting Chief Minister) तक कह डाला और कहा कि अब उन्हें उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है।
क्या था डिप्टी सीएम का वार?
इससे पहले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश को ‘कुर्सी मोह’ से ग्रसित बताते हुए कहा था कि केशव मौर्य उनके पारिवारिक सदस्य हैं और उनकी यह ‘सुपर जोड़ी’ जनता के भरोसे का प्रतीक है। पाठक ने अखिलेश को सलाह दी थी कि वे फर्जी बयानों के बजाय धरातल पर देखें, जहाँ भाजपा 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं केशव मौर्य ने भी खुद को चंद्रगुप्त मौर्य का वंशज बताते हुए सपा शासन में पिछड़ों पर हुए अत्याचारों का हिसाब चुकता करने की बात कही थी।
सोशल मीडिया बना अखाड़ा
बुद्ध पूर्णिमा के एक वीडियो से शुरू हुआ यह ‘स्टूल बनाम कुर्सी’ का विवाद अब भाजपा के आंतरिक तालमेल और 2027 की दावेदारी तक पहुँच गया है। अखिलेश यादव के ताजे हमले ने साफ कर दिया है कि वे भाजपा के दोनों बड़े चेहरों के बीच दरार दिखाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते।

