संन्यासी सरकार का नौकर नहीं हो सकता…बरेली में बोले शंकराचार्य, गो-वंश के मुद्दे पर घेरी योगी सरकार

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बरेली। ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने उत्तर प्रदेश की वर्तमान कानून व्यवस्था और गो-संरक्षण के दावों पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है। रविवार को बरेली प्रवास के दौरान उन्होंने एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सूबे में गो-हत्या के मामले थमने के बजाय लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने योगी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सनातन प्रेमियों को जिस बदलाव की उम्मीद थी, वह धरातल पर नजर नहीं आ रहा है।

​बूचड़खानों के संचालन पर उठाए सवाल

शंकराचार्य ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा, “प्रदेश में बूचड़खाने मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर से संचालित हो रहे हैं, जबकि इन्हें बंद करने का वादा किया गया था।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेशों से आने वाले उत्पादों में गो-मांस की मौजूदगी एक कड़वा सच है और उत्तर प्रदेश जैसे धार्मिक राज्य के लिए यह स्थिति शर्मनाक है।

​धर्म और राजनीति के संगम पर दो टूक

संतों के राजनीति में प्रवेश पर अपनी राय रखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि संत समाज का कार्य लोक कल्याण है, न कि सत्ता की लालसा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “धर्म और राजनीति की शपथ एक साथ नहीं ली जा सकती। एक संन्यासी कभी भी किसी प्रादेशिक सरकार का नौकर या अधीनस्थ नहीं हो सकता।” उनका यह बयान वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में संतों की सक्रियता पर एक बड़ी टिप्पणी माना जा रहा है।

1 मई से शुरू होगा ‘जागृति अभियान’

आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी रणनीति साफ करते हुए जगद्गुरु ने घोषणा की कि वे 1 मई से उत्तर प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों का व्यापक भ्रमण करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना होगा। उन्होंने सनातनी मतदाताओं से अपील की कि वे प्रदेश में केवल उसी सरकार का चयन करें जो पूरी प्रतिबद्धता के साथ गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सके।

​राजनीतिक गलियारों में हलचल

शंकराचार्य के इस मुखर अंदाज और सीधे हमलों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। विशेषकर ‘गो-वंश’ के मुद्दे पर सरकार को घेरने और सीधे जनता के बीच जाने के उनके ऐलान ने आने वाले समय में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।