लखनऊ/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के सियासी रण में तृणमूल कांग्रेस को मात देने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अब अपना पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश पर केंद्रित कर दिया है। ‘मिशन यूपी’ का आगाज करते हुए बीजेपी के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के बाद अब अगला निशाना समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव हैं।
बंगाल फतह से उत्साहित बीजेपी अब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के उस मजबूत किले को ढहाना चाहती है, जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव में भगवा रथ की रफ्तार पर ब्रेक लगाया था।
विपक्ष का ‘आखिरी मजबूत चेहरा’ बने अखिलेश
मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में अखिलेश यादव विपक्ष के सबसे प्रभावशाली योद्धा बनकर उभरे हैं। लोकसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी की 80 सीटों में से 37 सांसदों के साथ सपा नंबर वन पर है, जबकि बीजेपी 33 सीटों के साथ दूसरे पायदान पर खिसक गई है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘जीत की हैट्रिक’ लगाने से रोकना अखिलेश के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है।
सवाल यह है कि क्या अखिलेश फिर से ‘इंडिया गठबंधन’ के साथ मैदान में उतरेंगे या अकेले दम पर बीजेपी के इस चक्रव्यूह को काटेंगे?
बीजेपी का ‘नारी शक्ति’ कार्ड और अखिलेश की घेराबंदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल के नतीजों के तुरंत बाद संकेत दे दिया है कि अब लड़ाई सीधे लखनऊ की गद्दी के लिए होगी। बीजेपी ने अखिलेश को घेरने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को अपना मुख्य हथियार बनाया है। हाल ही में यूपी में बुलाए गए विशेष सत्र और पंचायतों से पास कराए गए प्रस्ताव इसी रणनीति का हिस्सा हैं। पीएम मोदी लगातार महिला आरक्षण के बहाने अखिलेश यादव को निशाना बना रहे हैं, जिसे बीजेपी घर-घर तक पहुँचाने में जुटी है।
योगी मंत्रिमंडल और संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
अखिलेश यादव की काट ढूंढने के लिए बीजेपी ‘ऑपरेशन यूपी’ के तहत संगठन और सरकार में बड़े फेरबदल करने जा रही है। योगी मंत्रिमंडल का संभावित विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम का गठन इसी बड़े लक्ष्य की ओर इशारा कर रहा है। बीजेपी उन नेताओं को विशेष रूप से टारगेट कर रही है, जो जमीनी स्तर पर सपा को मजबूती देते हैं।
दूसरी तरफ, अखिलेश यादव भी इस खतरे को बखूबी समझते हैं। 2024 में मिली सफलता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है, लेकिन बंगाल के नतीजों ने विपक्ष के खेमे में चिंता की लकीरें भी खींच दी हैं। अब देखना यह होगा कि क्या अखिलेश यादव अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और सॉफ्ट हिंदुत्व के नए अवतार के जरिए बीजेपी के इस ‘ऑपरेशन यूपी’ को नाकाम कर पाएंगे।

