आगरा: जनपद को कुपोषण मुक्त बनाने और बाल विकास सेवाओं को पारदर्शी बनाने के लिए जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित ‘जिला पोषण समिति’ की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली अब पारंपरिक ढर्रे पर नहीं चलेगी। उन्होंने पुष्टाहार वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या कालाबाजारी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को सीधी कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी।
डिजिटल रिपोर्ट कार्ड और हाईटेक आंगनबाड़ी
जिलाधिकारी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका अब केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए ‘पोषण ट्रैकर ऐप’ पर शत-प्रतिशत डेटा फीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और भाषाई विकास को मापने के लिए अब प्रत्येक बच्चे का एक विशेष ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार किया जाएगा। इसके लिए ‘रॉकेट लर्निंग’ और ‘प्रथम संस्था’ के सहयोग से प्री-प्राइमरी शिक्षा को और अधिक रोचक और वैज्ञानिक बनाया जाएगा।
कुपोषण के आंकड़ों पर डीएम की नाराजगी
बैठक में जब कुपोषित बच्चों का डेटा पेश किया गया, तो जिलाधिकारी ने आगरा शहर (338 सैम बच्चे) और एत्मादपुर, बिचपुरी जैसे ब्लॉकों में बच्चों की गंभीर स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित सीडीपीओ (CDPO) को निर्देश दिया कि वे खुद फील्ड में जाकर डेटा की सत्यता जांचें और हर अधिकारी कम से कम 10 सैम (SAM) बच्चों को चिह्नित कर उनकी फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपे। उन्होंने पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) की स्थिति पर भी चर्चा की और कहा कि एक भी बेड खाली नहीं रहना चाहिए।
ट्रेनिंग और पारदर्शिता पर जोर
कार्यकत्रियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए डीएम ने निर्देश दिया कि हर 25 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पर एक ‘मास्टर ट्रेनर’ नियुक्त कर 15 दिनों के भीतर सभी की गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग पूरी की जाए। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि तकनीक अपनाने से न केवल कार्य सरल होता है, बल्कि पारदर्शिता भी आती है। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों पर ईसीसी (ECC) किट की उपलब्धता और नए केंद्रों के निर्माण कार्य को गति देने के भी निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य, जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद कुमार सिंह सहित सभी सीडीपीओ और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अंत में सभी अधिकारियों ने व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया।


