आगरा: यमुना के पावन तट पर स्थित प्राचीन पुष्टिमार्गीय ‘श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज मंदिर’ इन दिनों अध्यात्म और भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर है। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर बुधवार को ठाकुर जी का प्राकट्योत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया।
मंदिर का प्रांगण अलौकिक सुगंध और भक्ति की तरंगों से गुंजायमान रहा। मोगरा और गुंजा के ताजे पुष्पों से सजे विशेष आसन पर जब ठाकुर जी महाराज के भव्य दर्शन हुए, तो भक्त श्रद्धा के सागर में डूब गए। मंदिर की दीवारों से टकराती ढोलक और मंजीरों की मधुर ध्वनि के बीच भक्तों द्वारा गाए गए कीर्तन, नृत्य और बधाइयों के स्वरों ने पूरे वातावरण को सात्विक ऊर्जा से भर दिया।
मनोरथों का मास: सेवा ही साधना है
मंदिर के महंत ननंद श्रोत्रिय और यमुना भक्त बृज खंडेलवाल ने आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुष्टिमार्गीय संप्रदाय में पुरुषोत्तम मास को ‘मनोरथों का मास’ कहा जाता है। इस दौरान प्रतिदिन प्रभु की सेवा में विशेष आयोजन किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि ‘फूल बंगला’ इस परंपरा का सबसे मनोहारी और प्रिय स्वरूप है, जिसमें ठाकुर जी को पूर्णतः सुंदर और शीतल पुष्पों से सुसज्जित किया जाता है। यह केवल एक सजावट नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति भक्त की शीतलता और सुख प्रदान करने की सात्विक भावना का प्रतीक है।
महंत जी के अनुसार, पुष्टिमार्ग के संस्थापक श्रीमद् वल्लभाचार्य ने ‘सेवा’ को ही मोक्ष का मार्ग और साधना का सर्वोच्च रूप बताया है। अष्टयाम सेवा पद्धति के तहत प्रभु की हर प्रहर में भिन्न-भिन्न रूपों में सेवा होती है। फूल बंगला मनोरथ इसी पद्धति का एक विस्तार है, जहाँ भक्त स्वयं अपने हाथों से फूलों को चुनकर, उन्हें गूंथकर प्रभु के चरणों में अपना प्रेम और समर्पण अर्पित करते हैं।
भक्ति और उल्लास का संगम
संध्याकालीन आरती के बाद जब प्रभु का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया, तो भक्तों के चेहरे पर एक अनोखी तृप्ति दिखाई दी। इस ऐतिहासिक उत्सव में आगरा के गणमान्य नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम में स्थानीय विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, राहुल गोयल, संजय बंसल, विकास गुप्ता, प्रशांत गोयल, शौर्य गोयल और शिल्पा गोयल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने प्रभु की सेवा में अपना योगदान देकर स्वयं को धन्य महसूस किया।


