आगरा शहर में साइबर अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया को ब्लैकमेलिंग का एक नया और खतरनाक हथियार बनाए जाने का मामला सामने आया है। यहाँ एक युवती की वास्तविक तस्वीरों का दुरुपयोग करते हुए इंस्टाग्राम पर उसकी एक फर्जी आईडी तैयार की गई। इसके बाद आरोपी ने युवती के नाम से आपत्तिजनक वीडियो अपलोड कर दिए और उसे सार्वजनिक करने की धमकी देते हुए यह दावा किया कि उसने युवती का पूरा फोन हैक कर लिया है। इस तरह के गंभीर दबाव और धमकियों के बीच आरोपी ने उससे पैसों की डिमांड शुरू कर दी।
डरकर युवती ने ट्रांसफर किए पैसे, पर नहीं रुका आरोपी
अचानक मिले इस प्रकार के धमकियों भरे संदेशों और मानसिक दबाव से युवती बुरी तरह सहम गई। आरोपी की लगातार पैसों की मांग के आगे विवश होकर डर के मारे युवती ने उसे शुरुआती तौर पर 400 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, इसके बाद भी शातिर आरोपी का लालच और हौसला कम नहीं हुआ। कुछ ही समय बाद उसने दोबारा से 10 हजार रुपये की बड़ी रकम की मांग कर दी।
जब पीड़िता ने लगातार पैसे देने में अपनी असमर्थता जताई, तो आरोपी ने अपना पैतरा बदलते हुए उसे जान से मारने तक की धमकी देनी शुरू कर दी। इन लगातार मिल रही धमकियों और ब्लैककमेलिंग के इस मानसिक टॉर्चर से तंग आकर आखिरकार पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने परिजनों को दी। परिजनों के सहयोग से उसने तुरंत साइबर क्राइम थाने पहुंचकर इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज कर इसकी गहन छानबीन शुरू कर दी है।
तकनीकी जांच में जुटी पुलिस और साइबर टीम
वर्तमान में पुलिस की तकनीकी जांच टीम आरोपी की ओर से बनाई गई फर्जी इंस्टाग्राम आईडी, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, ऑनलाइन पैसों के लेन-देन (ट्रांजैक्शन) और अन्य डिजिटल गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का भी प्रयास कर रही है कि आरोपी ने युवती की तस्वीरें और अन्य सामग्री आखिरकार कहां से हासिल की थी, तथा इस पूरी ब्लैकमेलिंग के पीछे कोई अकेला शातिर शख्स है या फिर इसके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह
इस तरह की घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी की फर्जी प्रोफाइल तैयार कर उसकी तस्वीरों का दुरुपयोग करना और आपत्तिजनक सामग्री का झांसा देकर ब्लैकमेल करना साइबर अपराध का एक बेहद गंभीर रूप है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को घबराने या डरकर बार-बार अपराधियों की मांग के अनुसार पैसे देने के बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या आधिकारिक साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।


