हमीरपुर में Gen Alpha स्कूली बच्चों का अनोखा और उग्र प्रदर्शन: तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्र, सड़क की बदहाली पर फूटा गुस्सा

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​उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सड़क की भारी बदहाली और बदतर हालातों से परेशान स्कूली बच्चों का गुस्सा मंगलवार को आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। कुरारा ब्लॉक के चंदूपुर से जुड़े लगभग आधा दर्जन डेरों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्थानीय ग्रामीणों के साथ अपने हाथों में तिरंगा झंडा थामे सीधे कलेक्ट्रेट जा पहुंचे।

बच्चों ने उग्र रूप दिखाते हुए डीएम कार्यालय के भीतर घुसने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें गेट पर ही रोक लिया। इसके बाद आक्रोशित बच्चों और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बारिश के बाद कीचड़ और दलदल में बदली सड़क

ग्रामीणों और बच्चों की मुख्य समस्या यह है कि स्कूल जाने वाली करीब डेढ़ किलोमीटर की यह महत्वपूर्ण सड़क बारिश होते ही कीचड़ और दलदल के भयानक रूप में बदल जाती है। इसके चलते छोटे-छोटे बच्चों का रोजाना स्कूल जाना तक दूभर हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों ने जानकारी दी कि इसी गंभीर समस्या को लेकर बीते 3 जुलाई को भी एक जोरदार प्रदर्शन किया गया था। उस समय प्रशासन द्वारा सड़क पर केवल मिट्टी डलवाकर रास्ते को किसी तरह चलने लायक बना दिया गया था, लेकिन जैसे ही दोबारा बारिश हुई, वह सारी मिट्टी बह गई और हालात एक बार फिर जस के तस पहले जैसे हो गए।

पुलिस-प्रशासन की कोशिशें रहीं नाकाम

​मंगलवार की सुबह जब स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का भारी हुजूम कलेक्ट्रेट की तरफ आगे बढ़ा, तो पुलिस और प्रशासन के अमले ने उन्हें रास्ते में ही रोकने के पुख्ता प्रयास किए, लेकिन प्रदर्शनकारियों का हौसला और गुस्सा कम नहीं हुआ। एसडीएम सदर अभिषेक कुमार और सीओ यशपाल सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की, इसके बावजूद छात्र और ग्रामीण डटे रहे और कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुँच गए।

​तीन हजार की आबादी और वैकल्पिक रास्ता बंद होने से बढ़ी मुसीबत

चंदूपुर और उसके आसपास के डेरों में कुल मिलाकर लगभग तीन हजार लोगों की आबादी निवास करती है। ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के मौसम में इस मुख्य रास्ते से निकलना किसी बड़े खतरे से कम नहीं होता। घर का कोई सदस्य बीमार पड़ जाए और उसे अस्पताल ले जाना हो, या फिर मासूम बच्चों को स्कूल भेजना हो, हर जरूरी काम के लिए ग्रामीणों को कीचड़ और गहरे दलदल से जूझना पड़ता है।

सोने पर सुहागा यह हुआ कि वन विभाग द्वारा वैकल्पिक रूप से इस्तेमाल होने वाला ‘सिटी फॉरेस्ट’ का रास्ता भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जिससे मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

पक्की सड़क की मांग पर अड़े ग्रामीण

​प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और बच्चों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अब किसी भी प्रकार की अस्थायी मिट्टी भराई या लीपापोती नहीं चाहिए। उनकी मांग है कि इस मार्ग पर तुरंत एक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि हर बार होने वाली बारिश में उनके बच्चों और परिवारों को इस नारकीय परेशानी से न गुजरना पड़े।

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सरकारी स्कूल के बच्चों द्वारा पक्की सड़क की मांग को लेकर डीएम ऑफिस के परिसर में किए गए इस अनोखे और जोरदार प्रदर्शन की झलक साफ देखी जा सकती है।