प्रयागराज/नोएडा: बीते ढाई सालों से सोशल मीडिया की सुर्खियों और कानूनी लड़ाइयों के केंद्र में रहा ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या का विवाद आखिरकार ‘हैप्पी एंडिंग’ तक पहुँच गया है। उत्तर प्रदेश की चर्चित PCS अधिकारी ज्योति मौर्या और उनके पति आलोक मौर्या ने अपने तमाम मतभेदों को किनारे रखकर एक बार फिर साथ रहने का फैसला किया है। यह खबर उन लाखों लोगों के लिए सुकून भरी है जो इस हाई-प्रोफाइल मामले को रिश्तों के उतार-चढ़ाव के रूप में देख रहे थे।
विवादों की आग से समझौते की छांव तक
2010 में शादी के बंधन में बंधे इस जोड़े के बीच 2015 में ज्योति के SDM बनने के बाद दूरियां आनी शुरू हुई थीं। मामला तब सार्वजनिक हुआ जब आलोक मौर्या ने अपनी पत्नी पर भ्रष्टाचार और बेवफाई जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए शासन तक गुहार लगाई थी। वहीं, ज्योति की ओर से भी कई पलटवार किए गए। आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर इतना लंबा चला कि शासन को तीन सदस्यीय जांच कमेटी तक बैठानी पड़ी। हालांकि, बाद में आलोक द्वारा अपनी शिकायतें वापस लेने के बाद कानूनी जांच का अध्याय बंद हो गया था।
नोएडा बनी नई कर्मभूमि, आलोक भी रेस में बरकरार
ताजा अपडेट के अनुसार, ज्योति मौर्या की पोस्टिंग अब नोएडा में हो गई है और वे अपने पति आलोक के साथ वहां नई शुरुआत कर चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि कभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में पहचान रखने वाले आलोक मौर्या भी अब खुद को प्रशासनिक रूप में ढालने की कोशिश कर रहे हैं। वे सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटे हैं और हाल ही में UP PCS के इंटरव्यू राउंड तक पहुँचे थे। हालांकि, अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आ सका, लेकिन उनका जज्बा बरकरार है।
सोशल मीडिया पर ‘ट्रेंड’ से ‘ट्रांसफॉर्मेशन’ तक
ज्योति और आलोक का मामला केवल एक पारिवारिक झगड़ा नहीं रहा, बल्कि यह देशव्यापी चर्चा का विषय बन गया था। इस विवाद ने समाज में ‘सफलता और रिश्तों के संतुलन’ पर एक बड़ी बहस छेड़ दी थी। आलोक ने इस दौरान ‘पुरुष आयोग’ के गठन की मांग उठाकर पुरुषों के अधिकारों की लड़ाई को भी हवा दी थी। सोशल मीडिया पर उनके चयन की अफवाहें भी उड़ीं, लेकिन अंततः खबर उनके साथ रहने की पुष्टि के रूप में सामने आई।
परिपक्वता की जीत: परिवारों ने ली राहत की सांस
बताया जा रहा है कि दोनों के बीच सुलह कराने में परिवार के बुजुर्गों और करीबी दोस्तों ने अहम भूमिका निभाई। ढाई साल तक चले मानसिक दबाव और सार्वजनिक छीछालेदर के बाद, दोनों ने महसूस किया कि कड़वाहट को भूलकर आगे बढ़ना ही बेहतर है। यह फैसला न केवल उनके बच्चों के भविष्य के लिए सुखद है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि संवाद से हर विवाद का समाधान संभव है।

