आगरा: शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) में 10वीं के छात्र पर हुए हमले के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) का उल्लंघन कर नाबालिग के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने के आरोप में दरोगा मनीपाल सिंह, मुंशी कमल चंदेल और सिपाही सनी धामा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या था मामला और कहाँ हुई चूक?
25 अप्रैल को स्कूल परिसर में एक छात्र ने दूसरे छात्र के चेहरे पर पंच मारकर उसके तीन दांत तोड़ दिए थे। पीड़ित छात्र के पिता पीयूष मल्होत्रा ने स्कूल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और पुलिस पर कार्रवाई में देरी के आरोप लगाए थे। सोमवार को डीएम मनीष बंसल से मुलाकात के बाद पुलिस ने आनन-फानन में आरोपी नाबालिग छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
कानून की अनदेखी बनी मुसीबत
नियमों के मुताबिक, 7 साल से कम सजा वाले मामलों में किसी नाबालिग पर सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। इसके लिए पहले सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार कर मामला किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के समक्ष रखना अनिवार्य है। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि इन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न करने के कारण ही पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। साथ ही, नाबालिग पर दर्ज एफआईआर को भी तकनीकी आधार पर समाप्त कर दिया गया है।
SHO भी जांच के दायरे में
इस लापरवाही के चलते थाना प्रभारी निरीक्षक (SHO) प्रदीप कुमार त्रिपाठी की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। उधर, जिलाधिकारी के निर्देश पर स्कूल प्रशासन की लापरवाही की जांच के लिए भी एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है।

