आगरा में विद्युत विभाग की ‘लापरवाही’ ने ली जान: छत के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से 20 वर्षीय युवक की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया हंगामा

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आगरा: ताजनगरी के थाना खेड़ा राठौर क्षेत्र स्थित गांव मझटीला के उपगांव ‘बिरखेपुरा’ में बुधवार को बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने एक गरीब परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया। घर की छत के ऊपर से गुजर रही जानलेवा हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से 20 वर्षीय युवक जितेंद्र की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे बचाने के लिए दौड़ी एक किशोरी भी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गई। इस घटना के बाद गांव में मातम पसर गया और आक्रोशित ग्रामीणों व मृतक के परिजनों ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर हंगामा किया।

मौत को दावत देती लाइन, प्रशासन की अनदेखी

परिजनों ने दर्दभरे लहजे में बताया कि जितेंद्र छत पर मौजूद था, तभी वह अनजाने में ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया। तेज झटके के साथ हुए हादसे ने पलक झपकते ही उसे काल के गाल में समा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह हादसा पूरी तरह से ‘सिस्टम की हत्या’ है।

उन्होंने बताया कि इस लाइन को हटाने या शिफ्ट करने के लिए विभागीय अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई गई थी, यहाँ तक कि तीन बार लिखित शिकायतें भी दर्ज कराई गईं, लेकिन विभाग ने हर बार इसे नजरअंदाज किया। ग्रामीणों का आरोप है कि लाइन शिफ्ट करने के नाम पर उनसे पहले दो लाख और बाद में 1.40 लाख रुपये की अनुचित मांग की गई थी, जिसे गरीब किसान परिवार भरने में सक्षम नहीं था।

पहले भी हो चुके हैं हादसे, लेकिन विभाग रहा ‘मौन’

ग्रामीणों ने इस बात पर गहरा रोष जताया कि यह हाईटेंशन लाइन पहले भी कई बार कहर बरपा चुकी थी। इससे पहले इसी लाइन की चपेट में आकर दो कुत्तों और एक मोर की जान जा चुकी थी। लोगों का कहना था कि जब चेतावनी के संकेत पहले ही मिल चुके थे, तब भी विभाग ने खतरे को कम करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

विभाग की इसी उदासीनता और भ्रष्टाचार ने आज एक होनहार नौजवान की जान ले ली। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक जितेंद्र के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है और उसका भाई पहले से ही विकलांग है, जिससे इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

​मुआवजे पर भड़के ग्रामीण, पुलिस ने संभाला मोर्चा

हादसे की सूचना मिलने पर विद्युत विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पांच लाख रुपये के मुआवजे व सरकारी सुविधाओं का आश्वासन दिया। हालांकि, यह आश्वासन आक्रोशित भीड़ को शांत करने के बजाय और भड़काने वाला साबित हुआ। ग्रामीणों का साफ कहना था कि धन से किसी की जान की कीमत नहीं चुकाई जा सकती, यदि विभाग ने समय रहते लाइन शिफ्ट कर दी होती तो आज एक मां का लाल जीवित होता।

अंततः, सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया और भारी मशक्कत के बाद ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया। पुलिस ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पूरे बिरखेपुरा गांव में घटना के बाद से भारी पुलिस बल तैनात है और लोग विद्युत विभाग के दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।