आगरा के जूता उद्योग पर ‘मिडिल-ईस्ट’ युद्ध की मार: कच्चे माल के दाम भड़के, जूतों की कीमतों में 20% तक का भारी उछाल

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आगरा: मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) में जारी युद्ध की लपटें अब आगरा के विश्वप्रसिद्ध जूता उद्योग को झुलसाने लगी हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में अस्थिरता के कारण जूता निर्माण में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल के दाम आसमान छू रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि जूतों की उत्पादन लागत में 10 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है, जिससे छोटे कारखानों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है।

बैठक में गूंजा संकट का शोर

रविवार को द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन और भीम युवा व्यापार मण्डल की एक संयुक्त आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने बताया कि जूते बनाने में इस्तेमाल होने वाले 34 प्रकार के कच्चे माल में से 32 सीधे तौर पर क्रूड ऑयल से जुड़े हैं। उन्होंने बड़े थोक विक्रेताओं और स्टॉकहोल्डर्स से मार्मिक अपील की है कि वे इस ‘आपादा में अवसर’ न तलाशें और पुराने स्टॉक को पुरानी कीमतों पर ही उपलब्ध कराएं ताकि छोटे उद्यमियों को राहत मिल सके।

​महंगाई का गणित: क्या हुआ कितना महंगा?

बाजार में कच्चे माल की कीमतों में आई तेजी ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है । पॉलीथिन: 140 रुपये/किलो से बढ़कर 210 रुपये/किलो। कुशन फोम: 300 रुपये/किलो से बढ़कर 400 रुपये/किलो, ईवा शीट: 50 रुपये/पीस से बढ़कर 55 रुपये/पीस, पीवीसी फोम: 250 रुपये से बढ़कर 300 रुपये, एयरमिक सोल: 70 रुपये/जोड़ी से बढ़कर 75 रुपये, पीयू सोल: 100 रुपये/जोड़ी से बढ़कर 110 रुपये, टीपीआर सोल: 100 रुपये/जोड़ी से बढ़कर 110 रुपये और पीयू अडहेसिव: करीब 10% की बढ़ोतरी हो गई है।

दोहरी मार: एलपीजी की किल्लत और डाई का काम ठप

कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ शहर में जारी एलपीजी (LPG) की किल्लत ने कोढ़ में खाज का काम किया है। गैस न मिलने के कारण ढलाई और डाई का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भीम युवा व्यापार मण्डल के अध्यक्ष प्रदीप कुमार पिप्पल ने कहा कि यदि सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उत्पादन ठप हो जाएगा और हजारों कारीगर बेरोजगार हो सकते हैं।

​आम आदमी की जेब पर असर

व्यापारियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण अब बाजार में सस्ता जूता मिलना मुश्किल होगा। जो जूता पहले ₹250 में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब ₹290 से ₹300 तक पहुँच गई है। बैठक में संजय मगन, प्रमोद महाजन, हरीश वंजानी और अजय महाजन सहित दर्जनों प्रमुख उद्यमी मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर इस संकट से लड़ने का संकल्प लिया।