कानपुर: शहर के न्याय के मंदिर (अदालत परिसर) में गुरुवार को उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब एक 24 वर्षीय उभरते हुए वकील ने बहुमंजिला इमारत की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान प्रियांशु श्रीवास्तव के रूप में हुई है। आत्महत्या से महज 21 मिनट पहले प्रियांशु ने व्हाट्सएप पर दो पन्नों का एक सुसाइड नोट साझा किया था, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस नोट में छिपे दर्द ने समाज और माता-पिता के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदालत परिसर में मची अफरा-तफरी
डिप्टी पुलिस कमिश्नर सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, प्रियांशु ने कोर्ट भवन की ऊंचाई से छलांग लगाई, जिसके बाद वहां मौजूद वकीलों और वादकारियों के बीच हड़कंप मच गया। लहूलुहान हालत में उन्हें तत्काल उर्सुला हॉर्समैन मेमोरियल (UHM) अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
”मैं हार गया, पापा जीत गए”: सुसाइड नोट की दर्दनाक दास्तां
प्रियांशु ने सुसाइड नोट में किसी बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि अपने ही घर में झेले गए मानसिक उत्पीड़न का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि बचपन में मात्र 6 साल की उम्र में फ्रिज से जूस पीने पर उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया गया था।
प्रियांशु ने अपनी व्यथा बताते हुए लिखा, “हर मिनट शक करना और एक-एक पल का हिसाब लेना मानसिक प्रताड़ना है। हाईस्कूल के रिजल्ट से पहले पिता ने धमकी दी थी कि नंबर कम आए तो नंगा करके घर से निकाल देंगे।”
नोट के आखिरी शब्दों ने सबको झकझोर कर रख दिया, जिसमें उन्होंने लिखा “रोज घुट-घुट कर जीने से बेहतर है एक बार मर जाना। मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरी लाश को मेरे पिता छू भी न पाएं। मैं हार गया और पापा जीत गए।”
समय की कमी से नहीं मिल सका था लाइसेंस
प्रियांशु ने 2025 में ही अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने नोट में जिक्र किया कि समय के अभाव के कारण वह उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से अपना स्थाई पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) प्राप्त नहीं कर सके थे। 23 अप्रैल की दोपहर 12:05 बजे लिखे गए इस नोट को उन्होंने अपने दोस्तों और पिता को भी फॉरवर्ड किया था, लेकिन जब तक कोई उन्हें बचाने पहुँचता, तब तक वह मौत को गले लगा चुके थे।
जांच में जुटी पुलिस
कानपुर पुलिस ने प्रियांशु का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। कोर्ट परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सके। यह घटना न केवल एक युवा करियर का अंत है, बल्कि बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव और परवरिश के तरीकों पर भी एक गंभीर चेतावनी है।

