नई दिल्ली/भागलपुर: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व कद्दावर सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हालिया बयानों ने उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक की राजनीति में खलबली मचा दी है। अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ बागी तेवर अपनाते हुए बृजभूषण ने बिहार के भागलपुर में आयोजित ‘बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव’ के मंच से तीखा हमला बोला। उन्होंने भरे मन और चुनौती भरे अंदाज में कहा कि वर्तमान सरकार की नजरों में आज उनका और उनके समाज का अस्तित्व हाशिए पर धकेल दिया गया है।
“उपयोगिता साबित करने को तैयार हूँ”
बृजभूषण ने सीधे तौर पर नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा, “अगर किसी को भी यह लगता है कि हम अब भार बन चुके हैं, तो उन्हें बस एक बार यह कह देना चाहिए कि अब हमारी जरूरत नहीं है।” उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि चाहे 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव हो या 2029 का लोकसभा चुनाव, वे अपनी राजनीतिक उपयोगिता और ताकत साबित करके दिखा देंगे। उन्होंने क्षत्रिय समाज से आत्ममंथन की अपील करते हुए कहा कि हमारी चुप्पी का ही नतीजा है कि आज हमें वह तवज्जो नहीं मिल रही जिसके हम हकदार हैं।
इतिहास और संविधान पर उठाए सवाल
अपने संबोधन में पूर्व सांसद ने इतिहास के स्थापित तथ्यों और संविधान निर्माण के श्रेय पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि संविधान का निर्माण अकेले बाबा साहब ने नहीं, बल्कि 242 सदस्यों वाली उस सभा ने किया था जिसमें बिहार का सबसे बड़ा योगदान था, जिसे आज भुला दिया गया है।
आजादी की लड़ाई का जिक्र करते हुए उन्होंने ‘साबरमती के संत’ वाले नारे पर तंज कसा और कहा कि इस नैरेटिव ने झांसी की रानी, बाबू वीर कुंवर सिंह और बिरसा मुंडा जैसे महान क्रांतिकारियों के बलिदान को मुख्यधारा से पीछे कर दिया।
”षड्यंत्र के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी”
अपने खिलाफ हाल के वर्षों में हुए विवादों को उन्होंने एक ‘विश्वव्यापी षड्यंत्र’ करार दिया। रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए उन्होंने अपना इरादा स्पष्ट किया कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
उन्होंने अपने समाज से कहा कि अब समझाने का समय निकल चुका है; अब बल, बुद्धि और विद्या अर्जित कर अपनी ताकत पहचानने का समय है। मंच पर तलवार लेकर सम्मानित हुए बृजभूषण ने साफ कर दिया कि वीर कुंवर सिंह का अनुयायी किसी के आगे झुकना नहीं जानता।

