लोन लेकर ऐश, फिर मांगा पत्नी से गुजारा भत्ता…इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकील पति पर ठोका 15 लाख जुर्माना

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उस याचिकाकर्ता पति को तगड़ा झटका दिया है, जो खुद अधिवक्ता होने के बावजूद अपनी पत्नी को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। कोर्ट ने न केवल पति की याचिका को खारिज कर दिया, बल्कि उस पर 15 लाख रुपये का भारी-भरकम हर्जाना भी लगाया है। जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने टिप्पणी की कि यह याचिका महज पत्नी को परेशान करने और तथ्यों को छिपाकर दायर की गई थी।

कोर्ट ने फटकारा: “वकील होकर खुद को बताया बेरोजगार”

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पति के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता शारीरिक रूप से सक्षम है और कानून का जानकार (अधिवक्ता) है, इसके बावजूद उसने अपनी नौकरीपेशा पत्नी से गुजारा भत्ता (Maintenance) पाने के लिए खुद को बेरोजगार बताया। कोर्ट ने पाया कि पति ने न केवल पिछले न्यायिक आदेशों को छिपाया, बल्कि अपनी पत्नी के भरोसे का फायदा उठाकर उसके नाम पर लाखों के लोन लिए और उन पैसों को अपनी विलासिता और शराब में उड़ा दिया।

क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत 2019 में हुई शादी के बाद हुई। दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, जिसके बाद पत्नी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपर निजी सचिव की नौकरी मिल गई। पत्नी का आरोप है कि उसके वकील पति ने जमीन खरीदने के नाम पर उसे झांसे में लिया और उसके वेतन खाते के आधार पर दो किस्तों में कुल ₹25 लाख से अधिक का पर्सनल लोन ले लिया। आरोपी पति ने चालाकी से यह पूरी रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली और उसे निजी शौक व शराब में खर्च कर दिया। अब स्थिति यह है कि पत्नी हर महीने ₹26,020 की EMI भर रही है, जो 2028 तक जारी रहेगी।

​तलाक और हर्जाने का आदेश

पति के बर्ताव से तंग आकर पत्नी ने मई 2025 में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। दूसरी ओर, पति ने एटा फैमिली कोर्ट से ₹5,000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता भी प्राप्त कर लिया था। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया कि पति को छह महीने के भीतर ₹15 लाख का हर्जाना डिमांड ड्राफ्ट के जरिए पत्नी को देना होगा। कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि यदि पति भुगतान नहीं करता है, तो उसकी चल और अचल संपत्ति की जांच कर इस राशि की वसूली की जाए।