नई दिल्ली/मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी क्षेत्र से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट (अनुज कुमार सिंह की अदालत) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है। कंगना की ओर से कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल कर आरोप लगाया गया है कि न्यायालय द्वारा शिकायतकर्ता (वादी) को ‘अनुचित लाभ’ दिया जा रहा है, जिससे निष्पक्ष न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
क्या है पूरा विवाद?
कंगना रनौत की अधिवक्ता सुधा प्रधान ने अधिवक्ता अनुसुइया चौधरी के माध्यम से अदालत में आवेदन दिया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि इस मामले में अंतिम बहस 30 अप्रैल, 2026 को ही संपन्न मान ली गई थी और 16 अप्रैल को आदेश की तिथि तय की गई थी। हालांकि, उस तिथि पर निर्णय नहीं सुनाया गया। कंगना पक्ष का आरोप है कि उस दौरान शिकायतकर्ता रमाशंकर शर्मा (एडवोकेट) को ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम’ (IT Act) के तहत बहस करने और फाइल पर ‘मार्क’ करने की अनुमति दी गई, जो सीधे तौर पर वादी को लाभ पहुँचाने जैसा है।
प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का आरोप
प्रार्थना पत्र में तर्क दिया गया है कि रिवीजन कोर्ट ने नवंबर 2025 में स्पष्ट आदेश दिया था कि इस मामले का निपटारा केवल मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाए। इसके बावजूद, वादी ने 3 अप्रैल, 2026 को कुछ अतिरिक्त दस्तावेज पेश किए जो पहले रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं थे।
कंगना पक्ष का कहना है कि इन नए दस्तावेजों पर उन्हें विस्तृत जवाब दाखिल करने का समुचित अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई है कि ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों का पालन करते हुए 30 अप्रैल को कोई आदेश पारित न किया जाए और उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए।
वादी का पलटवार: “यह न्यायालय का अपमान है”
दूसरी ओर, राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कंगना के प्रार्थना पत्र को न्यायालय की अवमानना और झूठे आरोपों का पुलिंदा करार दिया। रमाशंकर शर्मा का कहना है कि 16 अप्रैल को IT एक्ट पर कोई बहस नहीं हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फाइलों पर केवल ‘फ्लैग’ लगाए गए थे ताकि अदालत को साक्ष्य पढ़ने में सुविधा हो।
कोर्ट का रुख
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कंगना रनौत द्वारा दिए गए इस प्रार्थना पत्र पर विचार करने के लिए 30 अप्रैल, 2026 की ही तिथि निर्धारित की है। उसी दिन तय होगा कि कोर्ट अपना आदेश सुनाएगी या अभिनेत्री को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले ने कानूनी और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

