आगरा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिला कोर्ट के बाहर वकीलों के चैंबर तोड़े जाने और विरोध कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज का मामला अब पूरे प्रदेश में गरमाता जा रहा है। इसी कड़ी में ताजनगरी आगरा के कानूनविदों और वकीलों ने एकजुट होकर इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश दर्ज कराया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस आगरा मंडल विधि प्रकोष्ठ ने इस बर्बरता और दमनकारी नीति की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए सूबे की योगी सरकार को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया है।
बाबा साहब के संविधान बनाम योगी सरकार का बुलडोजर कानून
इस गंभीर मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस आगरा मंडल विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पवन शर्मा, उपाध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज मिश्रा और आई. डी. श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने संयुक्त बयान जारी किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजर तंत्र पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि देश का पूरा अधिवक्ता समाज आज भी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित पवित्र संविधान के दायरे में रहकर ही काम करता है। लेकिन जिस प्रकार से सत्ता के संरक्षण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे प्रदेश के भीतर इस दमनकारी ‘बुलडोजर कानून’ को जबरन लागू कर रहे हैं, उसे सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।
आज आगरा में जुटेगी अधिवक्ताओं की महापंचायत, बनेगी आगे की रणनीति
अधिवक्ता नेताओं ने अपने जारी बयान में स्पष्ट किया है कि लखनऊ की इस अमानवीय घटना और वकीलों के उत्पीड़न को लेकर पूरे प्रदेश के विधि समाज में भारी नाराजगी है। इस दमनकारी नीति के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने के लिए आज आगरा में सभी अधिवक्ताओं के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की ठोस रणनीति पर अंतिम मुहर लगेगी। उन्होंने चेताया कि पूरा अधिवक्ता समाज अब पूरी तरह से एकजुट हो चुका है और इस दमनकारी रवैये का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
”संसद में योगी जी का रोना हमें आज भी याद है” – वकीलों का तीखा तंज
प्रशासनिक बर्बरता पर बेहद तीखा और व्यक्तिगत तंज कसते हुए आगरा के अधिवक्ता समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके अतीत की याद दिलाई। अधिवक्ताओं ने कहा कि आज वकीलों पर लाठियां बरसाने वाले मुख्यमंत्री योगी जी को शायद याद न हो, लेकिन देश के अधिवक्ता समाज ने उनके सांसद काल के दौरान संसद के भीतर का वह मंजर भी देखा है, जब वे इसी पुलिसिया उत्पीड़न और अपनी जान की रक्षा की गुहार लगाते हुए देश की संसद में फूट-फूटकर रो पड़े थे।
वकीलों ने साफ किया कि जो व्यक्ति खुद कभी पुलिस की ज्यादतियों का शिकार होकर रो चुका हो, उसके राज में न्याय के रखवाले वकीलों पर इस तरह की बर्बरता होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।


