आगरा: राधास्वामी मत के तृतीय संत सतगुरु परम गुरु महाराज साहब का पावन भंडारा रविवार को दयालबाग में अत्यंत श्रद्धा, सेवा-भाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रातःकालीन आरती से लेकर द्वितीय शिफ्ट के कार्यक्रमों तक सतसंगी भाई साहबान, माताओं-बहनों और बच्चों ने कृषि सेवा, विशेष पाठ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तथा प्रीतिभोज में बढ़-चढ़कर सहभागिता की। इस पावन अवसर पर परम पूज्य गुरुमहाराज सतसंगियों के बीच पहुँचे, जहाँ बड़ी संख्या में उपस्थित संगत ने उनके अलौकिक दर्शन लाभ प्राप्त किए।
धान की कटाई और झड़ाई में जुटी रही संगत
दयालबाह में आयोजित इस भंडारे के दौरान कृषि सेवा को विशेष महत्व दिया गया। प्रातःकाल कुआं नंबर चार स्थित धान नर्सरी के खेतों में धान की कटाई के दौरान आरती का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर खेतों में दो विशेष पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
इस सेवा कार्य में भाई साहबान, बहनों, सुपरह्यूमेन स्कीम के बच्चों तथा उपदेश की हाजिरी वाले सभी लोगों ने पूरी निष्ठा से भाग लिया। इसके साथ ही, 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ भाई साहबान और बहनों ने भंडारा ग्राउंड पर पहुँचकर धान की झड़ाई की सेवा पूरी तन्मयता से निभाई। दूसरी शिफ्ट में भी भंडारा ग्राउंड पर धान की झड़ाई के साथ-साथ भव्य प्रीतिभोज का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों सतसंगियों ने प्रसाद ग्रहण किया। दयालबाग तथा देश-विदेश के विभिन्न अनुमत क्षेत्रों से पधारे सतसंगियों की सहभागिता से पूरे आयोजन में सामूहिक सेवा, अनुशासन और गहरी श्रद्धा का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
प्रेमनगर वेंटेज पॉइंट पर गुरुमहाराज के दर्शन
कार्यक्रम के दोनों चरणों में निर्धारित खेतों की ओर प्रस्थान करते समय परम पूज्य गुरुमहाराज प्रेमनगर स्थित वेंटेज पॉइंट पर विराजमान हुए। वहाँ पहले से ही दर्शन के लिए आतुर बड़ी संख्या में सतसंगी मौजूद थे। गुरुमहाराज के दीदार होते ही सतसंगियों में एक विशेष उत्साह और आत्मीय श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा।
कार्यक्रमों के उपरांत जब गुरुमहाराज ई-वाहन (EV) से अपने निवास की ओर लौट रहे थे, तब मार्ग के दोनों ओर खड़े सतसंगियों को उन्होंने अपनी दयामयी दृष्टि से भावविभोर कर दिया।
ई-कैस्केड के जरिए हुआ सजीव प्रसारण
भौगोलिक दूरियों को पाटेते हुए इस पावन भंडारे के संपूर्ण कार्यक्रमों का सजीव प्रसारण ई-कैस्केड (E-Cascade) के माध्यम से देश और विदेश की तमाम सतसंग शाखाओं में किया गया। इसके जरिए दुनिया के विभिन्न कोनों में मौजूद सतसंगी घर बैठे इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़े रहे और श्रद्धापूर्वक कार्यक्रमों का लाभ उठाया।
