नागपुर/नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 101वें स्थापना वर्ष और विजयादशमी के पावन अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने देश और दुनिया के वर्तमान हालातों, व्यवस्था विरोधी ताकतों, हालिया अंतरराष्ट्रीय आंदोलनों और भारत की बढ़ती ताकत पर विस्तार से बात की। मोहन भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) से किसी देश की मूल समस्याएं हल नहीं हो सकतीं, और वर्तमान समय में कुछ बाहरी ताकतें भारत की प्रगति में बाधा डालने की साजिश रच रही हैं।
”सत्ता परिवर्तन से कुछ नहीं बदलेगा, पश्चिम से उठा है अशांति का तूफान”
फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में हालिया अशांति का उदाहरण देते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यह एक ऐसा तूफान है जो पश्चिम से उठा है और हर तरह की स्थापित व्यवस्था के खिलाफ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलनों का वास्तविक उद्देश्य समस्याओं का समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में और अधिक विभाजन पैदा करना।
मोहन भागवत ने चेताया कि भारत की प्रगति से जलने वाली कुछ ताकतें देश को कमजोर करने की फिराक में हैं, जिन्हें कुछ ऐसे तत्वों का भी समर्थन मिल रहा है जो अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं और क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि भारत, हिंदू और संघ को किस प्रकार तोड़ा जाए (Dismantling), इसकी योजनाएं बनाकर कुछ आसुरी ताकतें कार्य कर रही हैं।
विविधता और सनातन परंपरा का महत्व
संघ प्रमुख ने देश के इतिहास और उसकी सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए कहा, “हम बंट गए और कमजोर हो गए, जिसके कारण हमें लंबे समय तक गुलामी झेलनी पड़ी। कई महान विभूतियों के प्रयासों से हमें स्वतंत्रता मिली। हमें एक बार फिर अपने भावनात्मक संबंधों को मजबूत करना होगा।”
उन्होंने कहा कि भारत प्राकृतिक विविधता, विभिन्न धर्मों, जातियों और खानपान का देश है। ऐसी स्थिति में हमें एक ऐसी समावेशी विचारधारा की जरूरत है जो इन सभी को स्वीकार करे और उनका सम्मान करे। हमारी ‘सनातन परंपरा’ इसी विचार को आत्मसात करती है।
नेपाल की त्रासदी और संतुलित विकास पर जोर
हाल ही में नेपाल में हुई भीषण प्राकृतिक त्रासदी का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि इस तबाही का एक प्रमुख कारण हिमालयी क्षेत्र में हुआ ‘एकतरफा विकास’ भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में इंसानी जान जाने से गहरा दुख हुआ है, और ऐसे संकट के समय राहत के लिए हम सब साथ आते हैं, लेकिन यह बेहद जरूरी है कि हम पर्यावरण और विकास के प्रति एक संतुलित और समग्र दृष्टिकोण अपनाएं। केवल ज्ञान और तकनीक हासिल करना काफी नहीं है, बल्कि उसके नैतिक और व्यावहारिक अनुशासन को समझना भी आवश्यक है।
संघ सभी का है, उद्देश्य पूरा होने तक जारी रहेगा कार्य
देश में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान आरएसएस को निशाना बनाए जाने पर मोहन भागवत ने दो टूक कहा कि जिन्हें संघ की निरंतर प्रगति और राष्ट्र सेवा नहीं पचती, वे ही संघ पर सवालिया निशान खड़े करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘संघ सभी का है’ और यह पूरे विश्व को अपना परिवार मानता है। संघ को अपने लिए कुछ भी नहीं चाहिए, और यह अपने निर्धारित राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य को पूरा होने तक लगातार कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत आरएसएस प्रमुख के औपचारिक स्वागत, संगठन के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित करने और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुई।
