साहित्यिक विमर्श: ‘क़िस्सा-कहानी’ में गूँजी हाशिए की आवाज़, ‘हवाई हमला’ कहानी से जीवंत हुई दलित चेतना
आगरा। “कोई मिलने नहीं आयेगा।” बूढ़ी किन्नर को पपीता सौंपते हुए पाती जब यह बोल रहा था। तब उसकी आँखों में बड़ी गहराई थी। छेदी उसे ऐसे ताक रहा था, जैसे किसी विमानभेदी तोप से बमबारी हुई हो और आसमान में आतिशबाजी करता हुआ गोला सही दिशा में जा रहा हो।” यह अंश है हिंदी […]
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