सहारनपुर की नई उड़ान: लकड़ी की नक्काशी के बाद अब अंडा उत्पादन में यूपी का ‘सिरमौर’ बना जिला

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लखनऊ/सहारनपुर: उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला, जो अपनी विश्वप्रसिद्ध लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) के लिए जाना जाता है, अब एक नई पहचान के साथ उभरा है। जिले ने ‘रजत क्रांति’ का नेतृत्व करते हुए अंडा उत्पादन के मामले में पूरे प्रदेश को पछाड़कर प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। यहाँ की पोल्ट्री इंडस्ट्री ने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि यहाँ के किसानों और कारोबारियों की किस्मत भी बदल दी है।

​प्रतिदिन 25 लाख अंडों का उत्पादन और पड़ोसी राज्यों में धाक

सहारनपुर जिले में वर्तमान में हर दिन 20 से 25 लाख अंडों का भारी उत्पादन हो रहा है। जिले की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए यहाँ से अंडों की खेप उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में भी भेजी जा रही है। जिला अब एक ‘मार्केट हब’ के रूप में विकसित हो चुका है। जहाँ पहले सहारनपुर दूसरे राज्यों से अंडे मंगवाता था, आज वही सहारनपुर एक बड़े निर्यातक की भूमिका निभा रहा है।

​कुक्कुट विकास नीति से मिली नई उड़ान

जिले की इस सफलता के पीछे 140 से अधिक बड़ी पोल्ट्री यूनिट्स का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की ‘कुक्कुट विकास नीति’ के तहत दी जाने वाली सब्सिडी और सुविधाओं ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है। प्रशासन का अगला लक्ष्य यहाँ के अंडा उत्पादन को वर्तमान क्षमता से तीन गुना तक बढ़ाना है, जिसके लिए नई यूनिट्स की स्थापना की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिला संबल

आधुनिक तकनीक के समावेश ने पोल्ट्री फार्मिंग को एक मुनाफे वाले सौदे में बदल दिया है। कम लागत में अधिक उत्पादन होने से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सहारनपुर की यह ‘रजत क्रांति’ भविष्य में उत्तर प्रदेश को अंडा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।