अयोध्या/नई दिल्ली। राम मंदिर चढ़ावा चोरी और ट्रस्ट के धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सोमवार को अधिवक्ता अनूप अवस्थी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि मामले में इतनी जल्दी क्यों है? कोर्ट ने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है और इस मामले पर नियमित सुनवाई अवकाश के बाद ही संभव होगी। अब इस याचिका पर 12 जुलाई के बाद सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में क्या है मांग?
याचिकाकर्ता ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। आग्रह किया गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई अधिकारी की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए। गौरतलब है कि कोर्ट ने अभी आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी किया है।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी
सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बीच, पुलिस ने रविवार को आठ में से सात अभियुक्तों के ठिकानों पर दिन भर छापेमारी की। अयोध्या सीओ आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में छह टीमों ने सुबह सात बजे से देर शाम तक अभियान चलाया। इस दौरान आरोपियों की संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, सोने-चांदी के गहने, सिक्के और नकदी बरामद की गई है। पुलिस ने आरोपी रामशंकर यादव ‘टिन्नू’, मनीष यादव, अविनाश शुक्ल, लवकुश मिश्र, अनुकल्प मिश्र, रमाशंकर मिश्र और करुणेश पांडेय के परिजनों से लंबी पूछताछ की।
संत समाज ने किया सीईओ की नियुक्ति का विरोध
इस बीच, राम मंदिर ट्रस्ट में ‘सीईओ’ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की नियुक्ति की मांग को लेकर संतों में भारी रोष है। मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र द्वारा दिए गए इस सुझाव को संत समाज ने सिरे से नकार दिया है। महंत नृत्यगोपाल दास के 88वें जन्मोत्सव समारोह के अंतिम दिन, देश भर से आए संतों ने ध्वनि मत से इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने व्यास पीठ से इस विरोध का एलान करते हुए कहा कि मंदिर में नौकरशाही का दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
यह प्रकरण अब कानूनी और धार्मिक दोनों स्तरों पर अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक ओर जांच एजेंसियां दस्तावेजों को खंगाल रही हैं, वहीं दूसरी ओर संत समाज ट्रस्ट की स्वायत्तता को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।


