रिश्तों में ‘आंगन’ बना रहे, दीवार नहीं…रेडियो मधुबन के कार्यक्रम में कवि कुमार ललित ने बिखेरे पारिवारिक मूल्यों के मोती

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आगरा। ब्रह्मा कुमारीज, माउंट आबू स्थित रेडियो मधुबन के ऑनलाइन चर्चित कार्यक्रम ‘बातें मुलाकातें’ की 2010 वीं कड़ी में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सम्मानित कवि कुमार ललित को फैमिली रिलेशनशिप विषय पर आयोजित स्पेशल एपिसोड के लिए विशेष अतिथि के रूप में सहभागिता करने का अवसर मिला।

आरजे रमेश खेड़े के संयोजन-संचालन में आयोजित कार्यक्रम में कवि कुमार ललित ने  पारवारिक रिश्तों में सामंजस्य बनाए रखने के लिए अहम त्याग कर निरंतर आत्मीय संवाद किए जाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में लाइव जुड़ रहे दर्शकों और श्रोताओं के प्रश्नों का जवाब देते हुए कुमार ललित ने युवा पीढ़ी को पारिवारिक मूल्यों से जोड़ना जरूरी बताया। यह भी कहा कि परिवार के विचारों में कितनी भी दूरी हो लेकिन मनों में दूरी नहीं रखनी चाहिए।

उन्होंने अपनी गीत- कविताओं से भी बिखरते पारिवारिक रिश्तों को सहेजने का संदेश कुछ यूँ दिया:- ” कुछ तन अच्छा हो जाएगा। कुछ मन अच्छा हो जाएगा। अपनों से मिलते रहना तुम। जीवन अच्छा हो जाएगा। रिश्ते, नाते, संबंधों से बढ़कर संसार नहीं करना। आँगन को आँगन ही रखना, इसमें दीवार नहीं करना.. “

इस दौरान सुधा दवे ने लोकप्रिय फिल्मी गीत “अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू कहाँ खतम, ये मंजिलें हैं कौन सी, न तुम समझ सके न हम” सुनाकर समाँ बाँध दिया।