आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव के 11वें दिवस भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति का मनोहारी श्रृंगार किया गया। भगवान को रानी रंग की आकर्षक पोशाक धारण कराई गई। स्वर्ण मुकुट एवं स्वर्णाभूषणों से अलंकृत महागणपति के मस्तक पर ओम तिलक सुशोभित रहा। केसर और रक्त चंदन से किए गए विशेष श्रृंगार ने भगवान के मुख-मंडल की आभा को और निखार दिया।
भगवान की वस्त्र श्रृंगार सेवा प्रतीक अग्रवाल की ओर से की गई। सेवा भाव से भगवान का वस्त्र श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की गई। फूलों से सजे आकर्षक फूल बंगले में विराजमान महागणपति के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हुए और मंगलकामना की।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने कहा कि पंचम गणेश महोत्सव में प्रत्येक दिवस भगवान के अलग-अलग स्वरूप का श्रृंगार भक्तों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। 11वें दिवस रानी रंग की पोशाक, ओम तिलक तथा केसर-रक्त चंदन का श्रृंगार भगवान के स्वरूप में विशेष आकर्षण लेकर आया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को प्रतिदिन नवीन श्रृंगार के माध्यम से भगवान के प्रति भक्ति और सेवा से जोड़ना ही महोत्सव की विशेषता है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित ने कहा कि केसर और रक्त चंदन का श्रृंगार भारतीय पूजा परंपरा में श्रद्धा और पवित्रता के भाव से जुड़ा है। भगवान के मस्तक पर ओम तिलक के साथ किया गया यह श्रृंगार उनके दिव्य स्वरूप को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान करता है।
मंदिर के प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि महोत्सव के प्रत्येक दिवस की पूजा, श्रृंगार और दर्शन व्यवस्था को विशेष रूप से व्यवस्थित किया जा रहा है। श्रद्धालु भगवान के बदलते स्वरूप के दर्शन के साथ पूजा-अर्चना और आरती में भी सहभागी बन रहे हैं।
महोत्सव का विशेष आकर्षण 101 किलो का मेवा मोदक भी बना हुआ है। इसे मंदिर की रसोई में शुद्ध मेवा से तैयार किया गया है। स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हुए इसे जालीदार स्वच्छ वस्त्र से ढककर रखा गया है और आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार उत्तर भारत में इस प्रकार का यह एकमात्र प्रयास है।
