मिशन 2027: यूपी चुनाव से पहले महिलाओं के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ की तैयारी, जनगणना और परिसीमन के बिना लागू हो सकता है आरक्षण

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​नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति’ को साधने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (33% महिला आरक्षण) को जनगणना और परिसीमन की लंबी प्रक्रियाओं से अलग कर सीधे लागू करने की संभावना तलाश रही है। यदि विपक्ष के साथ आम सहमति बनती है, तो यूपी के 2027 के रण में महिलाएं 33 फीसदी आरक्षित सीटों पर अपनी दावेदारी ठोकती नजर आएंगी।

​विपक्ष के पाले में गेंद: किरेन रिजिजू ने खरगे से की चर्चा

​मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इस मुद्दे पर बेहद सक्रिय हैं। उन्होंने इस अधिनियम में संशोधन के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से दो बार संवाद किया है। सरकार की मंशा इसी बजट सत्र (जो 2 अप्रैल तक प्रस्तावित है) में विधेयक में संशोधन लाकर इसे कानूनी रूप देने की है।

कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसे दल पहले ही परिसीमन की शर्त हटाकर इसे तुरंत लागू करने की मांग करते रहे हैं, ऐसे में सरकार अब उनकी राय के आधार पर ‘आम सहमति’ बनाने की कोशिश में जुटी है।

यूपी चुनाव पर पड़ेगा बड़ा असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यह कानून लागू होता है, तो यह भाजपा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। सरकार इस ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ विधेयक के जरिए आधी आबादी को सीधे तौर पर अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रही है।

क्या बदल जाएगा इस कानून से?

​इस विधेयक के माध्यम से संविधान के कई अनुच्छेदों में बदलाव किए गए हैं, जिनका स्वरूप अब और स्पष्ट होने वाला है:

लोकसभा: वर्तमान में महिला सांसदों की संख्या 82 है, जो कानून लागू होते ही 181 हो जाएगी।

विधानसभा: अनुच्छेद 332A के तहत राज्यों की विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं (SC/ST कोटा सहित) के लिए आरक्षित होंगी।

दिल्ली: अनुच्छेद 239AA के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में भी 33% आरक्षण अनिवार्य होगा।

समयावधि: यह आरक्षण शुरुआत में 15 वर्षों के लिए होगा, जिसे संसद भविष्य में आगे बढ़ा सकेगी।

सरकार अब विपक्षी दलों के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रही है, जिसके बाद वित्त विधेयक के साथ ही इस “धमाकेदार” संशोधन को पटल पर रखा जा सकता है।