पुलिस की आड़ में चल रहा है गुंडों का राज… सादाबाद में बीएसपी नेता आकाश आनंद ने कानून व्यवस्था और विज्ञापनों के खर्च को लेकर योगी सरकार को घेरा

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हाथरस: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर आकाश आनंद ने चुनावी मैदान में उतरते ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को हाथरस जिले के सादाबाद में अपनी पहली विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए आकाश आनंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर बेहद तीखे राजनीतिक हमले किए।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार किसी राजनीतिक मंच पर नजर आए आकाश आनंद ने अपने पुराने और आक्रामक अंदाज में भाषण की शुरुआत की। प्रदेश की कानून-व्यवस्था (Law and Order) पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि यूपी में बीजेपी सरकार के रिकॉर्ड की बात की जाए, तो यह हत्याओं के मामले में ‘अव्वल नंबर’ पर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों के दौरान पूरे देश में उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य रहा जहां सबसे अधिक हत्याएं दर्ज की गईं। यहाँ के मुख्यमंत्री खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बताते हैं और कानून के राज का बड़ा-बड़ा ढिंढोरा पीटते हैं, जबकि उनकी नाक के ठीक नीचे पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा आपराधिक वारदातें होती रहीं।

​विज्ञापन के खर्चों और सरकारी नाकामियों पर उठाए सवाल

योगी सरकार द्वारा विज्ञापनों पर किए जाने वाले खर्चों को आड़े हाथों लेते हुए आकाश आनंद ने कहा, “साथियों, 7000 करोड़ का आंकड़ा कोई छोटा-मोटी रकम नहीं है। पिछले 10 सालों में इस सरकार ने आपके टैक्स के पैसों से अपनी कमियां और नाकामी छुपाने में 7000 करोड़ रुपये विज्ञापन पर फूंक दिए।”

उन्होंने कहा कि बीजेपी पिछले 10 वर्षों में न तो हमारी माताओं और बहनों को पूरी तरह सुरक्षित रख पाई, न ही प्रदेश के युवाओं को रोजगार दे पाई और न ही बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला पाई।

उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे बीजेपी नेताओं की असलियत को समझें क्योंकि विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और ये लोग एक बार फिर आपके सामने छोटे-मोटे झूठे वादे और फर्जी मैनिफेस्टो लेकर आएंगे। उन्होंने जनता से अपील की कि इस चुनाव में इनसे पिछले 10 साल का पूरा हिसाब जरूर मांगा जाए।

​’क्या यह कानून का राज है या गुंडों का राज?’

रैली में मौजूद भारी जनसमूह से सीधा सवाल पूछते हुए बीएसपी नेता ने कहा, “जिस बाबा या एनकाउंटर की सरकार को बहुत प्रमोट किया जा रहा है, क्या वाकई वहां कानून का राज है, या फिर पुलिस की आड़ में गुंडों का राज चल रहा है? क्या ऐसी सरकार को जनता दोबारा मौका देगी?”

राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुई आगजनी और छात्रों की दर्दनाक मौत की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार 10 मासूम छात्रों की मौत पर केवल दुख जताने के सिवा कुछ नहीं कर सकती। सरकार के पास चार लाख से अधिक खाली पड़े सरकारी पदों को भरने के लिए धन नहीं है, लेकिन टैक्स के 7000 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर लुटाने के लिए इनके पास पूरा पैसा था। पिछले 10 साल में यूपी में 10 से अधिक बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर विज्ञापन का थोड़ा सा पैसा परीक्षाओं की शुचिता पर खर्च कर दिया जाता, तो आज प्रदेश के लाखों युवाओं को नौकरियां मिल जातीं। इसके अलावा उन्होंने शिक्षकों के खाली पड़े डेढ़ लाख पदों और लगातार बंद हो रहे सरकारी स्कूलों के गंभीर मुद्दे को भी उठाया।

सड़क निर्माण और एक्सप्रेस-वे की बदहाली पर निशाना

प्रदेश में सड़कों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आकाश आनंद ने कहा कि सरकार ने दावे किए थे कि भारत की सारी सड़कें अमेरिका से भी बेहतर बनाई जाएंगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का उदाहरण देते हुए कहा कि यह उद्घाटन और शुरू होने के महज 18 दिनों के भीतर ही 84 से ज्यादा जगहों पर धंस गया। इसे बनाने में साढ़े चार सौ करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मैंने पढ़ा है कि जिस कंपनी ने इसे बनाया, वह किसी भाजपा सांसद के भाई की कंपनी थी, ऐसे में मीडिया इस पर गंभीर चर्चा क्यों नहीं करता?

​उन्होंने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का जिक्र करते हुए कहा कि उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद या पहली बारिश में ही ये एक्सप्रेस-वे जगह-जगह से धंस गए। अप्रैल में उद्घाटन होने के बाद गंगा एक्सप्रेस-वे भी जुलाई में पांच से दस फीट तक जगह-जगह धंस गया।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि विकास देखना हो तो नोएडा और आगरा के एक्सप्रेस-वे को देखें, जो इतने लंबे समय बाद भी आज तक वैसे के वैसे ही मजबूत खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया कि जनता के गाढ़े कमाई के पैसों को किस तरह लूटा गया है, यह सबके सामने है।