आगरा। उत्तर प्रदेश की ताजनगरी में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर रचे गए एक बड़े जालसाजी के खेल का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। ‘सार्थक सोशल वेलफेयर सोसायटी’ के नाम पर फर्जीवाड़ा कर करीब 2.72 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना अरुण अग्निहोत्री उर्फ पंकज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह काफी समय से फरार चल रहा था।
ठगी का नया ‘मॉडल’ और शिकार बनीं 33 हजार महिलाएं
एसीपी सदर रामप्रवेश गुप्ता के नेतृत्व में सदर पुलिस और सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम ने इस शातिर अपराधी को लखनऊ के माधवग्रीन क्षेत्र से दबोचा। जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ने बड़े ही सुनियोजित तरीके से ‘नारी सशक्तिकरण योजना’ का नाम इस्तेमाल किया। महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देने, सरकारी मानदेय और प्रमाण पत्र दिलाने का प्रलोभन दिया गया। इस झांसे में आगरा समेत आसपास के कई जिलों की 33 हजार से अधिक महिलाएं फंसीं। उनसे रजिस्ट्रेशन और आवेदन के नाम पर मोटी रकम ऐंठ ली गई।
नकली दस्तावेज और प्रचार का जाल
ठगों ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में सघन प्रचार किया। फॉर्म भरवाने से लेकर नकली प्रमाण पत्र बांटने तक का काम बड़ी चतुराई से किया गया, जिससे महिलाओं को संस्था की विश्वसनीयता पर कोई संदेह न हो। हालांकि, जब लंबे समय तक सरकारी लाभ और रोजगार नहीं मिला, तब मामले का खुलासा हुआ और पीड़ित महिलाओं ने पुलिस की शरण ली।
पुलिस की सख्ती और फरार आरोपी की तलाश
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी अरुण अग्निहोत्री की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है, क्योंकि वह इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरोह का एक अन्य सदस्य आकाश सक्सेना अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
वर्तमान में पुलिस टीम ठगी के इस पूरे नेटवर्क का दायरा खंगालने के साथ ही पीड़ित महिलाओं का डेटा भी एकत्र कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले की जड़ें और कितनी गहरी हैं।


