आगरा: सिकंदरा स्मारक में 50 लाख पानी मे बहाने के बाद भी सियारों को पकड़ने में नाकाम रहे जिम्मेदार, अब एक-दूसरे के सर पर फोड़ रहे ठीकरा

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मौत के साए में हिरण, सियारों को पकड़ने के लिए 50 लाख बहा दिए पानी में!

आगरा। हमारे देश में दिन ब दिन ऐसे जानवरों की कमी होती जा रही है, जो कभी जंगलों की शान हुआ करते थे। ताजनगरी में सिकंदरा स्थित अकबर टॉम्ब के अंदर रह रहे हिरण जंगली सियारों का भोजन बन रहे हैं। कई बार स्मारक के अंदर खुलेआम घूमते सियारों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके बावजूद पुरातत्व और वन विभाग की तरफ से हिरणों और पर्यटकों की सुरक्षा के दृष्टिगत कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

बता दें कि सिकंदरा स्मारक में रह रहे हिरण पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य बिंदु होते हैं, लेकिन पुरातत्व और वन विभाग की अनदेखी से लगातार हिरनों की संख्या में कमी आ रही है। अब तक सियार कई हिरणों को अपना शिकार बना चुके हैं। खुलेआम सियार स्मारक परिसर में घूमते नजर आते हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग सारा ठीकरा वन विभाग पर फोड़ देता है। पुरातत्व विभाग के अनुसार इन सियारों को पकड़ने के लिए वह अब तक वन विभाग को 50 लाख से अधिक राशि दे चुके हैं।

क्या सरकारी पैसे का गबन कर गए अधिकारी?

सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि अगर पुरातत्व विभाग ने इतनी मोटी रकम सियारों को पकड़ने के लिए दी है, तो काम पूरा न होने पर पुरातत्व विभाग वन विभाग से जवाब तलब क्यों नहीं किया गया? चर्चा तो यह भी है कि पुरातत्व और वन विभाग के अधिकारी आपस में सांठगांठ कर पैसा पचा गए।

एक-दूसरे के सर पर फोड़ रहे ठीकरा

इस मामले में एएसआई चीफ राजकुमार पटेल से बात करने पर उन्होंने बताया कि हमारी तरफ से 50 लाख से अधिक राशि वन विभाग को सियार पकड़ने के लिए दी जा चुकी है।

सिकंदरा स्मारक के गार्डन इंचार्ज सोनवीर सिंह से बात की तो उन्होंने हिरणों की संख्या बताने से मना कर दिया उनका कहना था कि जवाब देने की सारी जिम्मेदारी सीए सिकंदरा की है।

सीए सिकंदरा अंकित सिंह नामदेव का कहना है कि हिरणों की संख्या के बारे में गार्डन इंचार्ज ही बता सकते हैं। उनकी जिम्मेदारी पुरातत्व बिल्डिंग के रखरखाव की है।

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