पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार 5 मार्च 2026 का दिन ऐतिहासिक उठापटक का गवाह बन सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने और केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने की खबरों ने उनकी अपनी ही पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर ‘विद्रोह’ की स्थिति पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमा हुए कार्यकर्ताओं और नेताओं ने दोटूक कह दिया है कि वे नीतीश कुमार को बिहार से जाने नहीं देंगे।
“हमने लाठियां खाईं, अब हमें अनाथ मत छोड़िए”
जेडीयू के कद्दावर नेता राजीव रंजन पटेल ने कैमरे के सामने भावुक होते हुए कहा, “अगर हम आज रोएं नहीं तो क्या करें? हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए लात-घूंसे और लाठियां सही हैं। 2025 में हमने घर-घर जाकर उनके नाम पर वोट मांगे। अगर आज वह हमें छोड़कर दिल्ली चले जाएंगे, तो बिहार के लोग और कार्यकर्ता कहां जाएंगे?”
निशांत कुमार को राज्यसभा भेजने की उठी मांग
कार्यकर्ताओं के बीच अब एक नया फॉर्मूला चर्चा में है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि अगर परिवार से किसी को राज्यसभा जाना ही है, तो नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को भेजा जाए। कार्यकर्ताओं की मांग है कि नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने रहें और निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाकर उन्हें राज्यसभा भेजा जाए। जेडीयू नेता संजय सिंह ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि निशांत पढ़े-लिखे हैं और उन्हें राजनीति में जरूर आना चाहिए।
”नामांकन दाखिल नहीं करने देंगे”
जेडीयू कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व को खुली चेतावनी दी है। राजीव रंजन पटेल ने कहा, “हम यहीं डटे रहेंगे और नीतीश कुमार को नामांकन दाखिल करने के लिए नहीं जाने देंगे। अगर किसी को लगता है कि वह नेतृत्व बदल सकता है, तो हिम्मत है तो चुनाव कराकर बहुमत लाए। हम नीतीश कुमार की जगह निशांत कुमार को नॉमिनेट होते देखना चाहते हैं।”
मातम में बदली होली
नेताओं का दावा है कि नीतीश कुमार के जाने की खबर से पूरे बिहार में गम का माहौल है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसी खबर के चलते कल राज्य में कई जगहों पर होली नहीं मनाई गई। कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले जमीनी स्तर के नेताओं से कोई राय-मशविरा नहीं किया गया।

