लखनऊ: फाल्गुन की पूर्णिमा के साथ ही उत्तर प्रदेश रंगों के एक विराट महाकुंभ में तब्दील हो गया। गांव की चौपालों से लेकर महानगरों की चकाचौंध तक, हर जगह बस गुलाल और लोकगीतों की गूंज रही। यह होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि यूपी की सांस्कृतिक विरासत और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का जीवंत प्रमाण बनकर उभरी।
गोरखनाथ मंदिर से सीएम योगी का संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक होलिकोत्सव का आगाज किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि होली सामाजिक समरसता और उल्लास का पर्व है। सीएम ने जोर दिया कि शांति और सुरक्षा के माहौल में ही उत्सव अपनी सार्थकता पाते हैं, और आज का यूपी इसी विश्वास के साथ विकास पथ पर अग्रसर है।
ब्रज से काशी तक: भक्ति और मस्ती का संगम
ब्रज की दिव्यता: मथुरा, वृंदावन और बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लठमार और फूलों की होली देखने के लिए विदेशी मेहमानों का तांता लगा रहा। नंदगांव के हुरियारों और बरसाना की गोपियों के बीच भक्ति और ठिठोली का अद्भुत संगम दिखा।
काशी का अलमस्त अंदाज: वाराणसी के घाटों पर बाबा विश्वनाथ की मस्ती छाई रही। ढोल-मंजीरे, पारंपरिक फाग और भांग की तरंग के साथ गंगा किनारे ‘हर हर महादेव’ के जयघोष ने उत्सव को आध्यात्मिक रंग दे दिया।
रामलला की नगरी में मर्यादा और प्रेम की होली
अयोध्या में इस बार की होली बेहद खास रही। प्रभु श्रीराम की नगरी में भक्ति, अपनापन और मर्यादा के साथ रंगों का खेल हुआ। गलियों में ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ युवाओं और बुजुर्गों की टोलियों ने एक-दूसरे को अबीर लगाया। यहाँ का संदेश साफ था राम की नगरी में उत्सव भी संस्कारों और एकता के धागे में पिरोया होता है।
अवध और पूर्वांचल: लोकधुनों का जादू
लखनऊ सहित पूरे अवध में शालीनता के साथ होली मिलन समारोह हुए, जहाँ हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने गले लगकर सौहार्द की मिसाल पेश की। वहीं, पूर्वांचल के जिलों में ढोलक की थाप पर रातभर फाग गीतों का दौर चला। बुंदेलखंड में महिलाओं की विशेष होली और पारंपरिक रस्मों ने इस उत्सव को पांच दिनों तक जीवंत रखा।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सामाजिक पहल
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल और ड्रोन तैनात रहे। इस बार खास बात यह रही कि लोगों ने ‘केमिकल फ्री’ रंगों और जल संरक्षण का संकल्प लेकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई।


