सूखी यमुना, सिसकता ताज: 41 साल से फाइलों में कैद है आगरा की ‘जीवनरेखा’, अब बैराज ही आखिरी उम्मीद

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बृज खंडेलवाल

ताजमहल के पीछे बहने वाली यमुना दशकों से सूखी पड़ी है, जिससे ताज की नींव, पर्यावरण और आगरा का भविष्य खतरे में है। नगला पैमा में प्रस्तावित बैराज 1986-87 से लंबित है, जबकि सभी तकनीकी और नीतिगत स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। बैराज ही जल संकट, भूजल गिरावट और शहरी पुनर्जीवन का स्थायी समाधान है। अब देरी नहीं, निर्णय होना चाहिए, क्योंकि नदी बचेगी तभी ताज और आगरा बचेंगे।

आगरा की पहचान ताजमहल है। पर ताज के पीछे बहती यमुना आज भीख मांगती नदी बन चुकी है। पानी नहीं। प्रवाह नहीं। जीवन नहीं। दशकों से एक प्रस्ताव फाइलों में धूल खा रहा है; ताजमहल से लगभग 1.5 किलोमीटर डाउनस्ट्रीम, नागला पेमा के पास यमुना पर एक बैराज का निर्माण। यह कोई नया विचार नहीं। यह 1986-87 से चली आ रही माँग है। कई बार शिलान्यास हुए। कई बार घोषणाएँ हुईं। पर यमुना आज भी सूखी है।

इस मुद्दे को फिर से उठाया है सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक, पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रेम प्रकाश ने। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे अपने विस्तृत ज्ञापन में साफ शब्दों में कहा है: “शहर 1984 से इंतज़ार कर रहा है। अब और देरी आगरा के भविष्य के साथ अन्याय होगा।”

क्यों ज़रूरी है यह बैराज?

सबसे पहली और सीधी ज़रूरत, ताज के पीछे सालभर जल भंडारण। आज सूखी यमुना ताजमहल की नींव और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा है। दूसरा, भूजल स्तर का लगातार गिरना। प्रेम प्रकाश लिखते हैं, “अत्यधिक दोहन और अनियंत्रित खपत के कारण भूजल नीचे चला गया है। पानी की कमी और गुणवत्ता दोनों बिगड़ी हैं।”

तीसरा, वर्तमान जल संस्थान संरचनाएँ: जीवनी मंडी और सिकंदरा, अब शहर की ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहीं।

“दोनों पुरानी हैं, विस्तार की गुंजाइश नहीं है,” वे कहते हैं। बैराज बनने पर दोनों किनारों पर नई जल परियोजनाएँ विकसित की जा सकती हैं। अभी तक अस्थायी समाधान के रूप में गंगा जल योजना से मथुरा के रास्ते पानी लाया जा रहा है। पर यह स्थायी इलाज नहीं।

आगरा को अपनी यमुना नदी चाहिए। वो भी स्वस्थ, जीवंत। इतिहास गवाह है कि 1986-87 से यह प्रस्ताव सार्वजनिक विमर्श में है। कई गणमान्य व्यक्तियों ने इसकी नींव रखी। 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं नागला पेमा स्थल का दौरा किया। सिंचाई विभाग ने डीपीआर तैयार की। सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय जल मंत्री की सहमति भी मिली। फिर भी काम आगे नहीं बढ़ा। फाइलें चलीं। समय बीता। नदी सूखती रही।

प्रेम प्रकाश अपने पत्र में लिखते हैं; “बैराज ओखला बैराज की तर्ज पर कंक्रीट का होना चाहिए, ताकि जल संकट का स्थायी समाधान हो सके और आपात स्थिति में सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध रहे।”

विकास का व्यापक खाका

यह केवल पानी का सवाल नहीं। यह समग्र शहरी पुनर्जीवन की योजना है।बैराज के साथ “नेविगेशन” को राष्ट्रीय जलमार्ग (NW-110) का हिस्सा बनाया जा सकता है। दोनों किनारों पर रिवर फ्रंट विकसित हो सकता है, ठीक साबरमती रिवर फ्रंट, अहमदाबाद की तर्ज पर। प्रेम प्रकाश सुझाव देते हैं: “नया आगरा, साइबर सिटी के रूप में, दोनों तटों पर विकसित हो सकता है, आधुनिक पुल और सड़क सुविधाओं के साथ।” ताज से लाल किले के बीच “आगरा चोपाटी” विकसित करने का विचार भी रखा गया है, मुंबई के जुहू चोपाटी की तर्ज पर। इससे बोटिंग, स्पीड बोट, पार्किंग, प्रवेश शुल्क, राजस्व और रोजगार सृजित हो सकते हैं। अनुमान है कि कम से कम 1000 लोगों को सीधा रोजगार मिल सकता है।

शाहजहाँ गार्डन को भी इस हरित कॉरिडोर से जोड़ा जा सकता है। सुबह-शाम सैर। शांत वातावरण।जीवंत नदी। पर्यटन को भी लाभ। रात भर ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

इस मुद्दे को जीवित रखा है “रिवर कनेक्ट” अभियान के कार्यकर्ताओं ने। ये वे योद्धा हैं जो हर शाम यमुना आरती स्थल पर एकत्र होते हैं। भजन, मंत्र और दीपदान करते हैं। दैनिक यमुना आरती अब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रही, कहते हैं पर्यावरणविद डॉ देवाशीष भट्टाचार्य। यह जन-जागरण का मंच बन चुकी है। आरती के बाद चर्चा होती है: बैराज क्यों ज़रूरी है।यमुना क्यों सूख रही है। सरकार को क्या करना चाहिए। युवाओं को जोड़ा जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों को समझाया जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों को संगठित किया जा रहा है।

“नदी बचेगी तो ताज बचेगा,” यह हमारा नारा है। अब निर्णय का समय है। आगरा को मेट्रो मिली। एयर कनेक्टिविटी मिली। बेहतर सड़कें और कानून व्यवस्था मिली। अब सबसे ज़रूरी अधोसंरचना बची है, यमुना पर बैराज। प्रेम प्रकाश लिखते हैं; “यह समय राजनीतिक रूप से भी उपयुक्त है और नागरिकों की पीड़ा को देखते हुए नैतिक रूप से भी।”

बैराज को प्रधानमंत्री गति शक्ति मिशन का हिस्सा बनाया जा सकता है। समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ स्पष्ट लक्ष्य तय हो। यह परियोजना केवल कंक्रीट की दीवार नहीं होगी। यह आगरा के आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना होगी।

ताजमहल विश्व धरोहर है। पर उसके पीछे बहती नदी स्थानीय जीवनधारा है। अगर यमुना यूँ ही सूखी रही तो ताज की परछाईं भी फीकी पड़ जाएगी। इतिहास हमें माफ़ नहीं करेगा। आगरा 41 वर्षों से इंतज़ार कर रहा है। अब इंतज़ार खत्म होना चाहिए। यमुना को फिर से बहना है। ताज के पीछे जल चमकना है। और यह तभी संभव है जब नगला पेमा में बैराज बने।