आगरा। ताजनगरी में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद जिले के हजारों स्कूल संचालक सरकारी आदेशों को ठेंगे पर रख रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आगरा के कुल 5690 स्कूलों में से केवल 2700 स्कूलों ने ही अब तक वाहनों के फिटनेस संबंधी शपथ पत्र जमा किए हैं। लगभग 2990 स्कूल संचालक अभी भी अपनी बसों और वैन का विवरण साझा करने में आनाकानी कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर बच्चों की जान जोखिम में डालने जैसा है।
पोर्टल पर ‘रेड मार्क’ होते ही होगी कार्रवाई
स्कूली वाहनों की निगरानी को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने 1 अप्रैल को ‘उत्तर प्रदेश इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल्स मॉनिटरिंग पोर्टल’ (UP-ISVMP) लॉन्च किया था। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत वाहन का नंबर डालते ही उसका इंश्योरेंस, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की कुंडली सामने आ जाएगी। यदि कोई वाहन मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो पोर्टल उसे तुरंत ‘रेड मार्क’ कर देगा, जिसके बाद एआरटीओ प्रशासन उसे सड़क से हटाने की कार्रवाई करेंगे। फिलहाल जिले के 1100 वाहनों का डेटा ही इस पोर्टल पर अपलोड हो सका है।
एआरटीओ का एक्शन: 40 गाड़ियों पर गिरी गाज
एआरटीओ प्रशासन विनय कुमार सिंह ने बताया कि अब तक 1100 स्कूली वाहनों की सघन जांच की जा चुकी है। इस दौरान गंभीर खामियां मिलने पर 40 गाड़ियों के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी स्कूल प्रबंधक पोर्टल पर गलत तथ्य पेश करेंगे या जानकारी छिपाएंगे, उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नैना हादसे से नहीं लिया सबक
प्रशासन की यह सक्रियता 11 मार्च को एत्मादपुर में हुए उस रूह कंपा देने वाले हादसे के बाद बढ़ी है, जिसमें आरबीएस स्कूल की 9 वर्षीय छात्रा नैना की जान चली गई थी। चलती बस के टूटे हुए फर्श से गिरकर मासूम पहिये के नीचे आ गई थी। जांच में खुलासा हुआ था कि वह मौत की बस पिछले 14 वर्षों से बिना किसी फिटनेस और रजिस्ट्रेशन के सड़कों पर दौड़ रही थी।
निरीक्षण में तकनीकी खामियों पर पैनी नजर
परिवहन विभाग की टीमें अब सड़कों पर उतरकर बस की खिड़कियों, फर्श, इमरजेंसी गेट और ब्रेक की तकनीकी जांच कर रही हैं। कागजों में हेराफेरी मिलने पर स्कूल प्रबंधकों की जवाबदेही तय की जा रही है। विभाग का कहना है कि स्कूली वाहनों की यह मॉनिटरिंग अब निरंतर जारी रहेगी ताकि भविष्य में नैना जैसा कोई और हादसा न हो।

