नई दिल्ली। पतंजलि उत्पादों और विशेष रूप से देशी घी की गुणवत्ता को लेकर भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा दिए गए बयानों पर अब राजनीतिक हलकों में समर्थन मिलने लगा है। इसी कड़ी में श्रीकल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने खुलकर बृजभूषण शरण सिंह के पक्ष में अपनी बात रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ और ‘फेसबुक’ पर पोस्ट साझा करते हुए पूर्व सांसद के बयानों का पुरजोर समर्थन किया है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पोस्ट में क्या कहा?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शनिवार दोपहर करीब 12 बजे सोशल मीडिया पर लिखा कि यह पूरा विषय बेहद गंभीर और संवेदनशील प्रकृति का है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता की जिंदगी और मौत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह को एक जिम्मेदार और देशभक्त नेता करार देते हुए कहा कि वे हमेशा संत-महात्माओं की सेवा, सत्कार और सम्मान करते आए हैं।
उन्होंने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि बृजभूषण का यह मानना है कि शुद्ध देशी घी के नाम पर मिलावट करके लोगों को एक तरह का ‘जहर’ बेचा जा रहा है, तो यह समाज के साथ बहुत बड़ा पाप और एक गंभीर दंडनीय अपराध है। अपनी इस पोस्ट में उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ-साथ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को भी टैग किया है।
50 करोड़ के मानहानि मुकदमे से गरमाया मामला
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि फूड्स लिमिटेड’ की ओर से बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया गया। इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चल रही है, जहां पिछली 15 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद के अधिवक्ताओं की तरफ से कोर्ट से कुछ और समय की मांग की गई थी।
बृजभूषण शरण सिंह का कड़ा रुख
इससे पहले कैसरगंज से भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पैतृक आवास विश्नोहरपुर में मीडिया से खुलकर बात करते हुए ऐलान किया था कि यदि अदालत उन्हें इस मामले में सजा सुनाती है और जेल भेजती है, तो वे अपनी जमानत नहीं करवाएंगे। उन्होंने दोटूक कहा था कि वे देशहित और जनहित के लिए सलाखों के पीछे जाने को पूरी तरह तैयार हैं, जिससे नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ देशव्यापी जागरूकता फैलेगी।
उन्होंने देश में धड़ल्ले से बिक रही नकली मिठाइयों, मावा, खोया, दही और खाद्य तेलों पर गहरी चिंता जताई थी। साथ ही पतंजलि के घी के सीमित उत्पादन और इसके दाम बढ़ाने की योजना पर भी सवाल उठाए थे। दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद जगजाहिर है, और अब आचार्य प्रमोद कृष्णम के समर्थन में उतर आने से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन गया है।
