फतेहपुर सीकरी में श्मशान घाट को लेकर उपजा विवाद: टीन शेड डलवाने को लेकर हुए धरने-प्रदर्शन के बाद सांसद राजकुमार चाहर के हस्तक्षेप से निकला समाधान

स्थानीय समाचार

आगरा/फतेहपुर सीकरी। ताजनगरी के ऐतिहासिक और धार्मिक शहर फतेहपुर सीकरी में नगर पालिका परिषद के अंतर्गत आने वाले वार्ड सीकरी-दो, लाल दरवाजा और आगरा गेट के आसपास की घनी आबादी के लिए लंबे समय से उपयोग में लाए जा रहे श्मशान घाट को लेकर शनिवार को अचानक तीखा विवाद खड़ा हो गया। ग्राम पंचायत मंडी गुड़ के गाटा संख्या ‘पहाड़ी की पार’ स्थित इस विशेष स्थल पर स्थानीय नागरिक पिछले कई दशकों से अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। वर्तमान में बारिश के मौसम के दौरान अंतिम संस्कार में होने वाली भारी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों ने वहां शेड (टीन शेड) डलवाने की तैयारियां शुरू की थीं, लेकिन पास स्थित एक विद्यालय प्रबंधन की आपत्ति के बाद मामला विरोध-प्रदर्शन और धरने तक जा पहुंचा।

​विद्यालय प्रबंधन की आपत्ति और धरने की नौबत

विवाद की मुख्य वजह यह बताई गई कि श्मशान स्थल के बिल्कुल समीप ही एक विद्यालय संचालित होता है। विद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया जा रहा था कि श्मशान घाट पर शवों का अंतिम संस्कार किया जाए। समिति का तर्क था कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में आधिकारिक रूप से श्मशान घाट के रूप में दर्ज नहीं है, इसलिए उन्होंने स्थानीय नागरिकों से किसी अन्य स्थान पर अंतिम संस्कार करने की बात कही थी।

दूसरी ओर, बारिश के दिनों में खुले आसमान के नीचे मृतकों का अंतिम संस्कार करने में जनता को हो रही असहनीय पीड़ा को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अनुमति और आपसी सहयोग से स्थल की साफ-सफाई करवाकर टीन शेड लगवाने का निर्णय लिया। जब विद्यालय प्रबंधन ने इस निर्माण कार्य का विरोध करते हुए काम रुकवाने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच तनाव काफी बढ़ गया और नाराज होकर स्थानीय लोग धरने पर बैठ गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सांसद राजकुमार चाहर के हस्तक्षेप से बनी बात

इस तनावपूर्ण धरने-प्रदर्शन की भनक जैसे ही स्थानीय सांसद राजकुमार चाहर को लगी, वे तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां धरने पर बैठे आक्रोशित लोगों से बड़े इत्मीनान से बातचीत की और उनकी पूरी समस्या सुनी। इसके बाद, स्थिति को संभालने के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति और स्थानीय नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल को तुरंत डाक बंगले पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया।

​डाक बंगले पर दोनों पक्षों के बीच विस्तार से चर्चा हुई। स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों के सामने तथ्य रखा कि वे पीढ़ियों से इसी जगह पर अंत्येष्टि करते आ रहे हैं और बरसात के मौसम में बिना छत के अंतिम संस्कार करना अत्यंत कठिन हो जाता है। वहीं, विद्यालय पक्ष ने राजस्व रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया। दोनों पक्षों की बात को गहराई से सुनने के बाद अंततः यह सहमति बनी कि बरसात के मौसम में आम जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए श्मशान घाट पर टीन शेड का निर्माण कराया जाएगा। इस सकारात्मक निर्णय के बाद धरने पर बैठे लोगों ने राहत की सांस ली।

​ब्लॉक प्रमुख और प्रशासनिक अधिकारियों की अहम भूमिका

इस पूरी सुलह-सफाई की प्रक्रिया के दौरान ब्लॉक प्रमुख गुड्डू चाहर ने भी दोनों पक्षों को आपसी प्रेम और सौहार्द का पाठ पढ़ाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को टकराव से नहीं, बल्कि बैठकर आपसी बातचीत के जरिए ही सुलझाना चाहिए। उनके सकारात्मक प्रयासों ने विवाद को थमाने में अहम भूमिका निभाई।

इसके अतिरिक्त, किरावली के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार ने भी कानून की स्थिति स्पष्ट करते हुए दोनों पक्षों को बताया कि यदि कोई जमीन लंबे अरसे से श्मशान घाट के रूप में इस्तेमाल होती चली आ रही है, तो कानूनन वहां अंतिम संस्कार करने से किसी को रोका नहीं जा सकता। बहरहाल, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की समय रहते की गई पहल से फिलहाल विवाद का शांतिपूर्ण हल निकल आया है और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य है।