लखनऊ के मोहनलालगंज में सनसनीखेज रामकिशोर वाल्मीकि हत्याकांड का खुलासा: पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर की थी पति की हत्या, शव को नहर में फेंका

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके में चर्चित रामकिशोर वाल्मीकि हत्याकांड का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस की शुरुआती जांच और खुलासे के मुताबिक, रामकिशोर की हत्या की इस खौफनाक साजिश को उसकी अपनी पत्नी सूफिया बानो ने अपने कथित प्रेमी और उसके साथी के साथ मिलकर अंजाम दिया था। हत्या के बाद शव को एक लकड़ी के बॉक्स में छिपाकर रखा गया और फिर ई-रिक्शा में लादकर नहर के पास ठिकाने लगाया गया था। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक नाबालिग को भी संरक्षण में लिया गया है।

पहली पत्नी की शिकायत पर शुरू हुई थी जांच

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक रामकिशोर की पहली पत्नी कविता देवी ने बीती 17 सितंबर को मोहनलालगंज थाने में पति की गुमशुदगी और अनहोनी की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस हरकत में आई और मामले की गंभीरता को समझते हुए घटनास्थल से लेकर शव को ठिकाने लगाने वाले संभावित रास्तों की बारीकी से पड़ताल शुरू की।

अवैध संबंध और पारिवारिक विवाद बना हत्या की वजह

पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि सूफिया और रामकिशोर के बीच करीब चार साल से संबंध थे और दोनों ने लगभग दो साल पहले ही निकाह किया था। लेकिन कुछ समय बाद रामकिशोर को सूफिया के मुन्ना उर्फ मुच्छड़ नाम के शख्स के साथ अवैध संबंधों की भनक लग गई, जिसके बाद से दोनों के बीच आए दिन विवाद होने लगा था। इसके अलावा, रामकिशोर अपनी पहली पत्नी से भी संपर्क में था और उसे घर का खर्च देता था, जिसे लेकर भी घर में अक्सर कलह और तनाव रहता था। इसी रंजिश के चलते हत्या की योजना बनाई गई।

​चाकू से हमला कर बेड के नीचे छिपाया था शव

पुलिस के अनुसार, 14 और 15 सितंबर की दरमियानी रात सूफिया ने अपने प्रेमी मुन्ना और उसके साथी इकबाल को अपने घर बुलाया। योजना के तहत दोनों ने सोते हुए रामकिशोर पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपियों ने घर में फैले खून के निशानों को मिटाने की पूरी कोशिश की। इसके बाद शव को एक लकड़ी के बड़े बॉक्स में रखकर पलंग (बिस्तर) के नीचे छिपा दिया गया और हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू व अन्य साक्ष्यों को भी छुपाने का प्रयास किया गया।

​ई-रिक्शा से ले जाकर नहर में फेंका शव

अगली रात यानी 15 और 16 सितंबर की रात को शव को ठिकाने लगाने का षड्यंत्र रचा गया। आरोपियों ने शव को एक ई-रिक्शा लोडर में रखा। पुलिस के मुताबिक, सूफिया, मुन्ना, इकबाल और एक नाबालिग मिलकर शव को कनकहा के पास भावाखेड़ा नहर पुलिया तक ले गए और वहाँ उसे नहर के नीचे फेंक दिया।

170 से अधिक सीसीटीवी कैमरों ने खोले राज

इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम कड़ी साबित हुई। पुलिस टीमों ने ई-रिक्शा के संभावित रूट का रूट-मैप तैयार किया और आसपास लगे करीब 170 से 180 कैमरों की फुटेज की घंटों तक जांच की। तकनीकी साक्ष्यों और मजबूत स्थानीय सूचना तंत्र की मदद से पुलिस आखिरकार ई-रिक्शा तक पहुँच गई और इसके बाद आरोपियों की पहचान उजागर हो गई।

​पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू और ई-रिक्शा भी बरामद कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मो. इकबाल उर्फ वसीर अहमद, मुन्ना उर्फ मुच्छड़ और सूफिया बानो के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपियों को विधिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश कर दिया है, और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।