आगरा। यमुना तट स्थित प्राचीन पुष्टिमार्गीय श्री मथुराधीश मंदिर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बसंतोत्सव’ ने भक्तों को आध्यात्मिक आनंद के चरम पर पहुँचा दिया। गुरुवार को मंदिर परिसर में बसंती घटा की अनूठी छटा देखने को मिली, जहाँ मोगरा और बेला के पुष्पों की खुशबू ने पूरे वातावरण को सुगंधित और भक्तिमय बना दिया।
बसंती घटा और विशेष श्रृंगार
प्रातःकाल से ही मंदिर में उत्सव का माहौल था। ढोलक की थाप और मंजीरों की झंकार के बीच श्रद्धालु ठाकुरजी के भजनों में लीन दिखे। बसंतोत्सव के पावन अवसर पर श्री मथुराधीश जी का दिव्य श्रृंगार किया गया। ठाकुरजी को सफेद मलमल के वस्त्र और स्वर्ण आभूषणों से सजाया गया, साथ ही उन्हें पीले रंग के विशेष पकवानों का भोग अर्पित किया गया।
पुष्टिमार्गीय परंपरा और रंगोत्सव की शुरुआत
यमुना भक्त बृज खंडेलवाल ने बताया कि यह उत्सव पूरी तरह से पुष्टिमार्गीय परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ। बसंतोत्सव के साथ ही अब ठाकुरजी की ‘खेल लीला’ और ‘रंगोत्सव’ की शुरुआत हो गई है। पुष्टिमार्ग संप्रदाय में बसंत पंचमी से ही होली एवं रंग-खेल उत्सव का आगाज माना जाता है, जो लगभग चालीस दिनों तक ‘डोलोत्सव’ तक जारी रहता है। इस दौरान मंदिर में बसंत राग के पद और कीर्तन की गूंज श्रद्धालुओं को ब्रज की लीलाओं का अनुभव कराती रही।
आगामी आयोजन: यमुना छठ की तैयारी
पुरुषोत्तम मास, जो पुष्टिमार्ग में ‘मनोरथों’ के विशेष माह के रूप में जाना जाता है, के चलते मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न उत्सवों की झड़ी लगी है। संध्या आरती का संचालन मंदिर के महंत नंदन श्रोत्रिय एवं जुगल श्रोत्रिय द्वारा किया गया।
महंत जी ने जानकारी दी कि आगामी 22 मई को यमुना आरती स्थल पर ‘यमुना छठ’ का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।
इस अलौकिक उत्सव में कमल खंडेलवाल, विनीत खंडेलवाल और निखिल खंडेलवाल समेत बड़ी संख्या में वैष्णव भक्तों ने सेवा भाव के साथ भागीदारी की।


