आगरा, 19 मई। ताजनगरी आगरा में इन दिनों भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म की अविरल त्रिवेणी लगातार प्रवाहित हो रही है। शहर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर आयोजित किए जा रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ और श्री शिवमहापुराण कथा आयोजनों में श्रद्धालु पूरी तरह से भक्ति रस में डूबे नजर आ रहे हैं। कहीं कुंती स्तुति और भीष्म भक्ति के पावन प्रसंगों के माध्यम से मानव जीवन के मूल्यों का संदेश दिया जा रहा है, तो कहीं सती चरित्र और माता पार्वती के जन्म प्रसंग के माध्यम से दांपत्य जीवन में आपसी सम्मान, अटूट विश्वास और समर्पण का दिव्य महत्व समझाया जा रहा है।
यमुना तट से लेकर लोहा मंडी और जयपुर हाउस तक गूंज रहे हरिनाम संकीर्तन और शिव नाम जप ने पूरे वातावरण को अलौकिक आध्यात्मिक रंग में रंग दिया है। श्रद्धालु कथा श्रवण के साथ-साथ संस्कार, सेवा और भक्ति के भाव में निरंतर गोते लगा रहे हैं।
यमुना तट पर अध्यात्म का अनूठा संगम: श्रीमनःकामेश्वर मंदिर मठ की भागवत कथा
यमुना तट स्थित ताज व्यू गार्डन फेस-1 पार्किंग क्षेत्र (यमुना किनारा रोड) पर श्रीमनःकामेश्वर मंदिर मठ द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर मंगलवार को भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कथा मंडपम की भव्य एवं दिव्य सज्जा, वहां स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के पवित्र दर्शन, कमल पुष्प पर विराजमान श्रीनाथजी का मनमोहक स्वरूप और संध्या बेला में हुई महायमुना आरती ने उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं को परम आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया।
भक्ति का आधार बाहरी वैभव नहीं, निष्कपट श्रद्धा है: श्रीमहंत योगेश पुरी
मुख्य व्यास पीठ से कथा व्यास श्रीमहंत योगेश पुरी ने कुंती स्तुति, भीष्म भक्ति और शुकदेव प्राकट्य प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण व मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति का वास्तविक आधार कोई गूढ़ ज्ञान नहीं, बल्कि हृदय का शुद्ध भाव है। भगवान कभी भी मनुष्य का बाहरी वैभव या धन-दौलत नहीं देखते, वे तो केवल भक्त की निष्कपट श्रद्धा को ही सहर्ष स्वीकार करते हैं।
उन्होंने पितामह भीष्म के प्रसंग के माध्यम से समझाया कि सच्ची और अनन्य भक्ति के वश में होकर स्वयं भगवान भी अपने भक्त के अधीन हो जाते हैं। कथा के दौरान उन्होंने राजा परीक्षित जन्म, सृष्टि के विराट स्वरूप और धर्म-प्रकृति के गूढ़ रहस्यों का भी विस्तार से वाचन किया।
बाल संस्कार शिविर में बच्चों को मिल रही सनातन शिक्षा
कथा के साथ-साथ सुबह के सत्र में आयोजित बाल संस्कार शिविर में त्रिलोकी बंसल एवं उमेश बंसल द्वारा बच्चों को योगाभ्यास कराया गया। इसके बाद गीता परिवार के राजीव गुप्ता ‘पार्थ’ ने बच्चों को गीता पाठ का सस्वर वाचन सिखाया, जबकि अनामिका वर्मा ने कलात्मक अभिरुचि बढ़ाते हुए एक्रेलिक आर्ट की ट्रेनिंग दी।
इस शिविर में प्रतिदिन 250 से अधिक बच्चे सनातन संस्कार और नैतिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर मठ प्रशासक हरिहर पुरी, सोनू गुप्ता, सीमा गुप्ता, सुमित मित्तल और उर्वशी मित्तल सहित अनेक मुख्य यजमानों ने व्यासपीठ का विधि-विधान से पूजन कर आशीर्वाद लिया।
लोहा मंडी में गूंजी शिवमहापुराण कथा: सती चरित्र का हुआ मर्मस्पर्शी वर्णन
दूसरी ओर, आगरा के लोहा मंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में ‘शिव परिवार संस्था’ द्वारा आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन मंगलवार को सती चरित्र और माता पार्वती के जन्म के प्रसंग ने पंडाल में मौजूद सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
शिव-पार्वती का जीवन गृहस्थ धर्म का सर्वोच्च आदर्श: मृदुल कांत शास्त्री
व्यास पीठ पर विराजमान प्रख्यात कथाव्यास मृदुल कांत शास्त्री ने सती चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी भी सफल दांपत्य जीवन में आपसी सम्मान, अटूट विश्वास और एक-दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण ही सबसे बड़ा और आदि धर्म है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के वैवाहिक जीवन को संपूर्ण मानव जाति के गृहस्थ धर्म का सर्वोच्च आदर्श बताते हुए कहा कि उनका यह पावन चरित्र हमें जीवन में संतुलन बनाए रखने और अपने कर्तव्यों के निष्ठापूर्वक निर्वहन का संदेश देता है।
इस धार्मिक आयोजन में भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने मुख्य रूप से शिरकत की और व्यासपीठ के दर्शन कर महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के मुख्य यजमान छोटेलाल बंसल और कांता बंसल ने सामूहिक रूप से व्यास पूजन संपन्न किया।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि बुधवार को कथा के चौथे दिन शिव-पार्वती विवाह महोत्सव का भव्य और दिव्य आयोजन किया जाएगा। वर्तमान में पूरा कथा स्थल सप्त शिवालय की नयनभिराम झांकियों और भोलेनाथ के भक्ति संकीर्तन से पूरी तरह गुंजायमान है।


