आगरा, 19 मई। ताजनगरी आगरा में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और आशा संगिनी कार्यकत्रियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। पिछले कई महीनों से रुके हुए मानदेय और लंबित भुगतान को लेकर इन महिला स्वास्थ्य कर्मियों का भारी आक्रोश मंगलवार को खुलकर सड़कों पर आ गया। अपनी बुनियादी मांगों को लेकर जिले भर से आईं सैकड़ों आशा कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हुईं और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय व स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए साफ कहा कि महीनों से रुके मानदेय के चलते अब उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अश्वासनों से नहीं, अब लिखित गारंटी से ही होगा काम
कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दे रही आशा और आशा संगिनी कार्यकत्रियों ने तीखा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पल्स पोलियो, जच्चा-बच्चा सुरक्षा, टीकाकरण और विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों सहित अनगिनत सर्वे कार्यों में उनसे दिन-रात ड्यूटी ली जाती है। लेकिन, जब मेहनत की गाढ़ी कमाई के भुगतान का समय आता है, तो अधिकारी केवल झूठे आश्वासन देकर उन्हें टला देते हैं। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
कार्यकत्रियों ने दोटूक लहजे में प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर थोप दी जाने वाली अतिरिक्त जिम्मेदारियों को वे अब तब तक स्वीकार नहीं करेंगी, जब तक कि नए सर्वे कार्यों के लिए उन्हें विभाग की ओर से लिखित भुगतान गारंटी प्रदान नहीं की जाती।
”एक्स्ट्रा काम का एक्स्ट्रा दाम” के नारों से दहला कलेक्ट्रेट परिसर
इस विशाल प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में “एक्स्ट्रा काम का एक्स्ट्रा दाम” का नारा सबसे प्रमुखता से गूंजता रहा। आशा बहुओं का कहना था कि उन्हें मिलने वाला नियमित मानदेय बेहद कम है, और उसके ऊपर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलाए जाने वाले अतिरिक्त अभियानों व सघन सर्वे कार्यों का बोझ भी उन्हीं पर डाल दिया जाता है। इसलिए, नियमित कार्यों के अलावा ली जाने वाली हर एक अतिरिक्त ड्यूटी के लिए अलग से सम्मानजनक और पारदर्शी मानदेय तत्काल तय होना चाहिए।
20 मई से 5 जून 2026 तक संपूर्ण हड़ताल का बड़ा अल्टीमेटम
आंदोलनकारी कार्यकत्रियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को बेहद कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनके लंबित पड़े बकाए का तुरंत निस्तारण नहीं किया गया और उनकी जायज मांगों पर तत्काल कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे कल यानी 20 मई से आगामी 5 जून 2026 तक संपूर्ण हड़ताल पर चली जाएंगी।
महिला स्वास्थ्य कर्मियों की इस 15 दिवसीय प्रस्तावित हड़ताल से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं, नवजात शिशुओं का टीकाकरण और मातृ सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम पूरी तरह से ठप हो सकते हैं।
इस भारी विरोध-प्रदर्शन के चलते कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बनी रही। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया।
अधिकारियों ने वक्ताओं से उनकी मांगों का पत्रक (ज्ञापन) लिया और आश्वासन दिया कि उनकी समस्त जायज मांगों को त्वरित कार्रवाई के लिए शासन स्तर और स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंचाया जाएगा।


