मुजफ्फरनगर: भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और कद्दावर भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है। मुजफ्फरनगर के नसीरपुर गांव में किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह के पिता की शोक सभा में पहुँचे बृजभूषण ने स्पष्ट किया कि वह अभी भारतीय जनता पार्टी के साथ ही हैं। समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चाओं को उन्होंने फिल्मी अंदाज में खारिज करते हुए कहा, “कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।”
परिवार की राजनीतिक ताकत का दिया हवाला
मीडिया से बातचीत के दौरान अपनी सियासी मजबूती का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि उनके परिवार की जड़ें राजनीति में कितनी गहरी हैं। उन्होंने कहा कि उनका एक बेटा वर्तमान में सांसद है, दूसरा विधायक है और उनकी पत्नी भी पूर्व में सांसद रह चुकी हैं। खुद छह बार संसद पहुँचने वाले बृजभूषण ने यह जताने की कोशिश की कि उनका प्रभाव किसी पद या तात्कालिक परिस्थिति का मोहताज नहीं है।
2027 के चुनाव पर रहस्यमयी चुप्पी
जब पत्रकारों ने उनसे 2026 की मौजूदा स्थितियों और 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने भविष्य की किसी भी योजना पर मुहर लगाने या भविष्यवाणी करने से साफ इनकार कर दिया।
बृजभूषण ने संक्षिप्त में कहा, “मैं इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं कह सकता।” उनका यह टालमटोल भरा जवाब राजनीतिक गलियारों में इस बात का संकेत दे रहा है कि वह भविष्य के लिए अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
विनेश फोगाट और विवादों से बनाई दूरी
चर्चा के दौरान जब पहलवान विनेश फोगाट द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और हालिया बयानों का जिक्र आया, तो बृजभूषण शरण सिंह रक्षात्मक मुद्रा में नजर आए। उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी नई टिप्पणी करने से परहेज किया और सवाल को मुस्कुराकर टाल दिया।
बृजभूषण सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा के भीतर और बाहर उनके कद और भविष्य की भूमिका को लेकर बहस छिड़ी हुई है। एक ओर जहां वह खुद को भाजपा का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं 2027 पर उनकी चुप्पी और विनेश फोगाट मामले पर बोलने से बचना यह दर्शाता है कि वह फिलहाल विवादों से दूर रहकर सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में वह अपनी इस ‘शायराना’ राजनीति को किस नई दिशा में मोड़ते हैं।

