​’मिशन रोजगार’ को नई रफ्तार: सीएम योगी ने बांटे 609 नियुक्ति पत्र, बोले- ‘अगले साल 1.5 लाख और भर्तियां’

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ‘मिशन रोजगार’ के अभियान को और अधिक गति देते हुए प्रदेश के युवाओं को खुशहाली की एक नई सौगात दी है। रविवार को राजधानी के लोक भवन सभागार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के 357 नव-चयनित कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान सीएम ने साफ कर दिया कि प्रदेश में अब केवल ‘योग्यता’ ही चयन का एकमात्र आधार है।

​साफ नीयत और स्पष्ट नीति के दिखे परिणाम

नवनियुक्त युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब शासन की नीति स्पष्ट और नीयत साफ होती है, तो परिणाम सकारात्मक ही आते हैं। उन्होंने गौरव के साथ उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा पूरी की गई यह भर्ती प्रक्रिया सुशासन का एक जीवंत उदाहरण है।

सीएम ने बताया कि प्रदेश अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देकर देश में पारदर्शी चयन प्रक्रिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना चुका है।

​भ्रष्टाचारियों को सीधी चेतावनी: उम्रकैद और संपत्ति होगी जब्त

मुख्यमंत्री ने भर्ती परीक्षाओं में सेंधमारी करने वाले तत्वों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में अब युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। यदि कोई भी व्यक्ति भर्ती प्रक्रिया में धांधली करते हुए पाया गया, तो उसे आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी और उसकी पूरी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि “हमारे पास इसके लिए अब अत्यंत सख्त कानून है और हम इसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कर रहे हैं।”

अगले साल 1.5 लाख नई नियुक्तियों का लक्ष्य

रोजगार की राह देख रहे युवाओं के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा रोडमैप भी साझा किया। उन्होंने घोषणा की कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के भीतर शिक्षा सेवा चयन आयोग, लोक सेवा आयोग (UPPSC), अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और पुलिस भर्ती बोर्ड के माध्यम से डेढ़ लाख से अधिक रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

​बीमारू पहचान से बाहर निकला उत्तर प्रदेश

अतीत की सरकारों पर प्रहार करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व में चयन प्रक्रियाओं में होने वाला भेदभाव, बेईमानी और भ्रष्टाचार ही उत्तर प्रदेश की ‘बीमारू राज्य’ वाली छवि के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने कहा कि पहले की अनियमितताओं के कारण बार-बार न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता था, जिससे युवाओं के साथ-साथ उनके माता-पिता की उम्मीदें भी टूट जाती थीं। अब उत्तर प्रदेश उस दौर से बाहर निकलकर अवसर की समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहा है।