छठ पूजा पर नाक से मांग तक क्यों लंबा सिंदूर लगाती हैं महिलाएं? जानिए इस पवित्र परंपरा का धार्मिक और वैज्ञानिक सच

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लखनऊ। लोक आस्था का महापर्व ‘छठ’ केवल भगवान भास्कर (सूर्य देव) और छठी मैया की कठोर तपस्या व उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि यह पति, संतान और संपूर्ण परिवार की सुख-समृद्धि से जुड़ी अनेक पावन सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं का भी जीवंत प्रतीक है। छठ पूजा के दौरान व्रती सुहागिन महिलाओं के बीच एक अत्यंत विशेष और नयनाभिराम रवायत देखने को मिलती है। इस महापर्व पर महिलाएं सामान्य दिनों की तरह केवल मांग में सिंदूर न भरकर, नाक के ऊपरी हिस्से (नथुने) से लेकर पीछे सिर तक लंबा गाढ़ा सिंदूर लगाती हैं।

​जनसामान्य में यह सुदृढ़ मान्यता है कि ऐसा करने से स्वामी (पति) की आयु दीर्घ होती है और वैवाहिक जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास रहता है।

​अखंड सौभाग्य और समर्पण की प्रतीक है यह रवायत

​मुख्यतः बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के क्षेत्रों में छठ पूजा के चारों दिनों—विशेषकर अर्घ्य देने के दौरान—सुहागिन व्रती महिलाएं लंबा सिंदूर धारण करती हैं। सनातन और लोक मान्यताओं में सिंदूर को सुहाग, परम सौभाग्य और अक्षुण्ण वैवाहिक संबंध का प्रतीक माना गया है।

नाक की नोक से लेकर पूरी मांग तक लंबा सिंदूर लगाना पति के प्रति स्त्री के अनन्य प्रेम, निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है। यद्यपि अलग-अलग क्षेत्रों में इस परंपरा को निभाने की पद्धतियों और स्थानीय लोक कथाओं में सूक्ष्म भिन्नता देखने को मिलती है, परंतु सबका मूल भाव एक ही है—पति का कल्याण।

क्या वास्तव में बढ़ती है पति की उम्र? जानिए वैज्ञानिक पहलू

​धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से सिंदूर को पति की सुरक्षा, समृद्धि और दीर्घायु की कामना का मुख्य माध्यम माना गया है। वहीं यदि आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो ऐसा कोई प्रत्यक्ष या प्रमाणित वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जो यह सिद्ध करे कि नाक से मांग तक सिंदूर लगाने से पति की शारीरिक उम्र में वृद्धि होती है।

​तथ्यात्मक रूप से इसे किसी वैज्ञानिक नियम के बजाय विशुद्ध रूप से धार्मिक आस्था, सुदीर्घ पारंपरिक विश्वास और लोक संस्कृति के भावनात्मक जुड़ाव के रूप में देखना ही तर्कसंगत है।

​छठ पर्व पर व्रती महिलाएं अत्यंत कठिन निर्जला उपवास और पवित्रता के नियमों का पालन करती हैं। ऐसे में उनके द्वारा धारण किया जाने वाला यह लंबा सिंदूर केवल एक शारीरिक श्रृंगार का अंग भर नहीं है, बल्कि यह उनकी अगाध आस्था, पतिव्रता धर्म, अटूट प्रेम और परिवार के उज्ज्वल भविष्य की सामूहिक मंगलकामना का सर्वोपरि प्रतीक है।