आगरा। ताजनगरी की जिला जेल में बंद खूंखार अपराधियों के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ने की आशंका ने जेल प्रशासन और खुफिया विभाग की नींद उड़ा दी है। जेल के भीतर बन रहे गुटों और हिस्ट्रीशीटर अपराधियों की सक्रियता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह ‘अलर्ट मोड’ पर आ गया है। संभावित खूनी संघर्ष और गैंगवार को टालने के लिए आनन-फानन में कुख्यात अपराधी आलोक यादव को आगरा जिला जेल से हटाकर फिरोजाबाद जेल शिफ्ट कर दिया गया है।
वर्चस्व की जंग: आमने-सामने मोनू और आलोक गुट
सूत्रों के मुताबिक, आगरा जेल में पहले से ही कुख्यात हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव बंद है। खुफिया इनपुट मिले थे कि जेल के भीतर मोनू यादव और आलोक यादव के गुटों के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। दोनों ही गुटों के बीच पुरानी रंजिश और वर्चस्व को लेकर तनाव चरम पर था। किसी भी अप्रिय घटना या खूनी झड़प को रोकने के लिए जेल प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए आलोक यादव का ठिकाना बदल दिया।
हाई-प्रोफाइल बंदियों पर ‘तीसरी आंख’ का पहरा
जेल के भीतर केवल मोनू यादव ही नहीं, बल्कि चर्चित राज चौहान हत्याकांड के आरोपी भी बंद हैं। विभिन्न आपराधिक पृष्ठभूमि वाले इन संवेदनशील बंदियों की मौजूदगी ने जेल परिसर को ‘हाई-रिस्क जोन’ बना दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है।
अब हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील बैरकों की सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे डिजिटल निगरानी की जा रही है। हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर सीधे उच्चाधिकारियों की नजर है।
शिफ्टिंग की तैयार हो रही है नई फेहरिस्त
जेल प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए अन्य संवेदनशील बंदियों की भी एक सूची तैयार की जा रही है, जिन्हें जल्द ही अलग-अलग जनपदों की जेलों में भेजा जा सकता है। इसके लिए उच्चाधिकारियों से समन्वय स्थापित कर लिया गया है।
जेल के भीतर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई है और हर बैरक की सघन तलाशी ली जा रही है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जेल की चारदीवारी के भीतर शांति बनाए रखना और किसी भी गुटीय हिंसा को जड़ से खत्म करना है।

