आगरा में ‘देवदूत’ बना मजदूर: पिता की डांट से आहत युवती ने यमुना में लगाई छलांग, सुखवीर ने जान पर खेलकर बचाया

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आगरा। ताजनगरी के थाना डौकी क्षेत्र अंतर्गत नगला सिंघी में रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहाँ पारिवारिक कलह और पिता की डांट से क्षुब्ध होकर एक 18 वर्षीय युवती ने यमुना पुल से उफनती नदी में छलांग लगा दी। जब मौत करीब थी, तब नियति ने एक ‘देवदूत’ को भेज दिया। पास ही काम कर रहे श्रमिक सुखवीर ने अपनी जान की परवाह किए बिना उफनती लहरों में छलांग लगा दी और डूबती हुई युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सुखवीर की इस अदम्य बहादुरी की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।

​भावुक आवेश में उठाया खौफनाक कदम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाजिदपुर निवासी युवती रविवार दोपहर पुल पर काफी देर से गुमसुम और बेहद परेशान खड़ी थी। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने अचानक ऊंचे पुल से नीचे नदी में छलांग लगा दी। उसे गिरता देख किनारे पर मौजूद ग्रामीणों में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर पास ही मजदूरी कर रहे सुखवीर ने एक पल की भी देरी नहीं की और युवती को बचाने के लिए पानी में कूद पड़ा। काफी मशक्कत के बाद उसने युवती को किनारे तक पहुँचाया।

​पिता की डांट बनी आत्मघाती कदम की वजह

सूचना मिलते ही थाना डौकी पुलिस और युवती के परिजन मौके पर पहुँच गए। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि युवती का घर में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद पिता ने उसे डांट दिया था। पिता की फटकार से आहत होकर उसने अपनी जीवनलीला समाप्त करने जैसा आत्मघाती फैसला ले लिया। पुलिस ने बताया कि समय रहते रेस्क्यू होने के कारण युवती अब पूरी तरह खतरे से बाहर है और उसकी हालत स्थिर है।

​मानसिक दबाव और युवाओं की चुनौतियां

इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मामूली विवाद और मानसिक तनाव युवाओं को इस कदर क्यों तोड़ रहा है।

पुलिस अब युवती और उसके परिजनों की काउंसलिंग की तैयारी कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। फिलहाल, ग्रामीणों और पुलिस प्रशासन ने सुखवीर के साहस की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है, जिसकी सूझबूझ ने एक घर का चिराग बुझने से बचा लिया।